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कोर्ट ने सीबीआइ से मांगी स्टेटस रिपोर्ट

बिजली बोर्ड में हुई गड़बड़ी की जांच कर रही सीबीआइ से झारखंड हाइकोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। जस्टिस आरके मेरठिया और जस्टिस डीएन उपाध्याय की कोर्ट ने सीबीआइ से यह बताने को कहा है कि कोर्ट केआदेश के बाद उसने क्या कार्रवाई की और जांच किस स्थिति में है। अदालत ने सरकार से भी पूछा है कि राज्य में बिजली की स्थिति में सुधार के लिए नई ऊर्जा नीति कब तक बन जाएगी।

इस संबंध में एमएस मित्तल ने जनहित याचिका दायर की है। इसमें कहा गया है कि राज्य में बिजली की स्थिति में सुधार के लिए सरकार कुछ नहीं कर रही है। पीटीपीएस एवं अन्य प्लांटों के जीर्णोद्धार के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, पर प्लांट की स्थिति नहीं सुधर रही है। पूर्व में कोर्ट ने बोर्ड के कामकाज और गड़बड़ी की सीबीआइ जांच का निर्देश दिया था।

पिछली सुनवाई में सरकार ने बताया था कि बिजली की स्थिति में सुधार के लिए नई ऊर्जा नीति बनायी जी रही है। तब कोर्ट ने ऊर्जा नीति की जानकारी देने को कहा था। सोमवार को सरकार ने इसके लिए समय की मांग की। इसके बाद कोर्ट ने दो हफ्ते का समय दिया है।

एमएस मित्तल बने अमेकस क्यूरी
इस मामले के अमेकस क्यूरी (कोर्ट को सहयोग करने के लिए नियुक्त अधिवक्ता) एमएस मित्तल को नियुक्त किया गया है। पहले अधिवक्ता अपरेश सिंह अमेकस क्यूरी थे। उनके जज बनने के बाद एमएस मित्तल को बनाया गया। मित्तल इस केस के प्रार्थी हैं और वह पहले भी अमेकस क्यूरी नियुक्त किए गए थे।

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