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जान दे देंगे, पर नहीं देंगे जमीन

बरेली। वरिष्ठ संवाददाता

बड़ा बाईपास के बाद अब फोरलेन के मामले में पेंच फंस गया है। फतेहगंज पश्चिमी में सड़क के चौड़ीकरण के लिए जारी की गई अधिसूचना के विरोध में तमाम किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे और एक सुर में कहा कि वे जान दे देंगे, लेकिन अपनी जमीन नहीं देंगे। किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन और एनएचएआई अतिक्रमण हटाने के बजाय नई जमीन पर सड़क बनाना चाह रहे हैं।

फतेहगंज पश्चिमी के गांव भिटौरा नौगवां, ठिरिया खेतल और उनासी के तमाम किसान सोमवार को कलेर्क्ेट पहुंचे। किसानों का कहना था कि उनसे नेशनल हाईवे के 230.040 किलोमीटर से 232.400 किलोमीटर तक के भूखंड मांगे जा रहे हैं। ये भूखंड सड़क चौड़ीकरण के नाम पर मांगे जा रहे हैं, जबकि सच यह है कि सड़क के दोनों ओर 120-120 मीटर जमीन नेशनल हाईवे की है।

ऐसे में नई जमीन अधिग्रहीत किए बगैर सड़क चौड़ी की जा सकती है, लेकिन अतिक्रमण हटाने से बचने के लिए फतेहगंज पश्चिमी में छोटा बाईपास बनाने की कोशिश की जा रही है, जिसके लिए तीन गांवों के तमाम किसानों की जमीन अधिग्रहीत करने की योजना है।एसएलएओ का नोटिस मिलने के बाद हुए एकजुटकिसानों को कुछ दिन पहले ही एसएलएओ कार्यालय से जारी नोटिस मिला। इसमें किसानों से नौ अप्रैल की सुबह 10 बजे तक कलेक्ट्रेट आकर पक्ष रखने को कहा गया था। किसानों का कहना था कि उनके पास आजीविका का कोई और साधन नहीं है।

जमीन से ही उनके परिवार का खर्च चलता है। अगर एनएचएआई जमीन ले लेगी तो उनका परिवार संकट में पड़ जाएगा। किसानों ने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने जमीन अधिग्रहीत करने की कोशिश की तो उसे आंदोलन का सामना करना पड़ेगा। किसानों की आपत्तियों पर किया जाएगा गौर एसएलएओ व एसडीएम सदर रवीन्द्र कुमार ने बताया कि फतेहगंज पश्चिमी में छोटा बाईपास बनाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम 1956 की धारा 3-ग के तहत कार्रवाई की गई है। इस पर आपत्ति दाखिल करने की सोमवार को अंतिम तारीख थी। कुछ किसान अपनी आपत्ति दाखिल करने आए थे। उनकी आपत्ति पर गौर किया जाएगा।

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