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नदियों को जोड़ने से किसानों की बल्ले-बल्ले

बरेली। सुरेश पाण्डेय

नदियों को जोड़ने की योजना पर केंद्र सरकार भले ही हीलाहवाली करे, बरेली में यह काम वर्षो से चल रहा है। यहां नदियों के पानी को डैम में एकत्र कर उन्हें नहर के जरिए किसानों तक पहुंचाया जा रहा है। इससे बरेली के 11 ब्लॉकों के लाखों किसान लाभान्वित हो रहे हैं और विभाग को इससे राजस्व भी मिल रहा है। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने नदियों को जोड़ने की परियोजना शुरू की थी। इसके पीछे उद्देश्य यह था कि हर साल नदियों के अतिरिक्त पानी को दूसरी नदी से जोड़कर उस पानी का सदुपयोग किया जा सके। इस योजना के लाभ भी बताए गए।

पहला लाभ तो बताया गया कि किसानों को सिंचाई की सुविधा के साथ-साथ बाढ़ से बचाव हो सकेगा। बड़े पैमाने पर बिजली का उत्पादन किया जा सकेगा और बड़ी नदियों में जल यातायात भी सुचारु बनाया जा सकेगा। एनडीए सरकार के बाद यूपीए सरकार ने परियोजना पर ब्रेक लगा दिया, लेकिन बरेली में इस योजना पर काम चल रहा है। बरेली में शारदा, बहगुल और देवहा नदी को जोड़कर बनाई गई एसडीवी फीडर से जिले के 15 में से 11 ब्लॉकों के किसानों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। कैसे जुड़ी हैं नदियांउधम सिंह नगर में बने नानक सागर डैम से निकाले गए पानी को आगे बहगुल नदी में मिलाया गया। बनबसा से निकली शारदा नदी और पीलीभीत से निकली देवहा नदी अमरिया के पास दूनी बैराज पर मिलती हैं। इन नदियों का पानी बहेड़ी में चुरैली रेगूलेटर पर मिलता है और वहां से एसडीबी फीडर बनकर नहर में जो पानी चल रहा है, वह 11 ब्लॉकों के किसानों को लाभान्वित कर रहा है। बनबसा में शारदा नदी के पानी को रोककर बनाए गए डैम से बिजली उत्पादन हो रहा है। जबकि इसके अतिरिक्त पानी को तीन जगह डिवाइड कर इसका सदुपयोग किया जा रहा है। इन ब्लॉकों के किसान हो रहे लाभान्वितजिले के भोजीपुरा, फतेहगंज पश्चिमी, शेरगढ़, बहेड़ी, दमखोदा, नवाबगंज, भदपुरा, फरीदपुर, बिथरी, भुता आदि ब्लॉकों के किसान इससे लाभान्वित हो रहे हैं। सरकारी पानी लेने वाले इन ब्लॉकों के किसानों से विभाग हर साल पानी का शुल्क वसूलता है और अपनी आय में इजाफा करता है।

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