DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

शाबास! किराए की राइफल से भी बटोरे कई तमगे

किराए की रायफल से तमगे ही तमगे। यह कारनामा कानपुर निवासी सब इंस्पेक्टर रंजना ने कर दिखाया है। आस-पड़ोस से लेकर पुलिस महकमे को भी अब रंजना पर नाज है। लेकिन रंजना का वर्तमान जितना खुशगवार दिखता है, अतीत उतना ही कठिन दौर से गुजरा है। पुलिस में आने पहले रंजना ने सड़क पर पटाखे और राखी बेचकर पढ़ाई की है।

गुजैनी, निवासी रंजना इन दिनों जालौन में तैनात है। पिता चिरौंजीलाल गुप्ता बिना पूंजी लगाए एक बस में पार्टनर थे। जो कुछ मिलता, उससे बमुश्किल घर चलता था। पांच भाई और दो बहनों में रंजना सबसे छोटी हैं। अपने पैतृक घर बिल्हौर से रंजना ने हाईस्कूल किया। पूर्णादेवी कॉलेज से इंटर कर आगे पढ़ने की सोची तो पिता ने खर्च उठाने में असमर्थता जता दी। फिर एक सहेली से 19 सौ रुपये लेकर डीएवी कॉलेज में बीएससी में एडमिशन लिया। टयूशन के जरिए आगे पढ़ाई चली। एमएससी करने के बाद लखनऊ से बीएड और कानपुर के एएनडी कॉलेज से एमएड किया। वर्ष 2001 में सब इंस्पेक्टर की जगह निकली। चयन भी हुआ। मुरादाबाद में ट्रेनिंग का खर्च उधार लेकर चलाया। रंजना ने बताया कि विभाग की ओर से गोल्ड मेडल पर 12 हजार, रजत पदक पर 10 हजार तथा कांस्य पदक पर 8 हजार रुपये का पुरस्कार मिलता है। वह उन्हें भी मिला है। हर प्रतियोगिता के पहले रंजना किराए की रायफल हैदराबाद से लेती हैं।

रंजना की ख्वाहिश
रंजना की चाहत है कि उनके पास अपनी रायफल हो। ताकि वह दुनिया को अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सके। इसके लिए उन्हें कम से कम 20 लाख रुपयों की जरूरत है। विदेश से आनेवाली इस रायफल की कीमत यूं तो 6.50 से 10 लाख तक है। पर, पूरे साजो-सामान के साथ इसे लेने पर लागत 20 लाख तक आती है। रंजना का मानना है कि यह रकम वे खुद से नहीं जुटा सकतीं। इसके लिए समाज को ही आगे आना होगा।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:शाबास! किराए की राइफल से भी बटोरे कई तमगे