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यमुना और ग्रेनो मास्टर प्लान पर 80 आपत्तियों के साथ

 गाजियाबाद। गौरव त्यागी

यूपी सबरीजनल प्लान में शामिल यमुना और ग्रेटर नोएडा मास्टर प्लान पर एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने कई सवाल उठाए हैं। उत्तर प्रदेश शासन ने सबरीजनल प्लान 2031 एनसीआर प्लानिंग बोर्ड में जमा किया था। इस पर 80 से अधिक आब्जेक्शन प्लानिंग बोर्ड ने लगाए हैं। ग्रेटर नोएडा मास्टर प्लान पर आठ आपत्ति लगाई गई हैं। सबरीजनल मास्टर प्लान में सबसे बड़ी आपत्ति यमुना प्राधिकरण मास्टर प्लान को लेकर है। सबरीजनल प्लान में यमुना एक्सप्रेस वे टाउनशिप को मेट्रो सेंटर बताया गया है। यहां 35 लाख की आबादी बसाने की योजना है। एनसीआरपीबी ने सवाल उठाया है कि रीजनल प्लान में यमुना एक्सप्रेस-वे टाउनशिप मेट्रो सेंटर नहीं है। ऐसे में सबरीजनल प्लान में उसे मेट्रो सेंटर कैसे बना दिया गया?  सबरी जनल प्लान में केवल सबरीजनल सेंटर, सर्विस सेंटर, बेसिक विलेज और सेंट्रल विलेज बनाने थे। ऐसे में यमुना टाउनशिप को लेकर सवाल उठे हैं। एनसीआर यूपी सेल की आयुक्त रही प्रोमिला शंकर ने भी शासन को इस संबंध में पत्र भेजा था। यूपी ने सबरीजनल प्लान 2001 के डाटा को लेकर बनाया है। एनसीआरपीबी ने इसे 2011 के आधार पर बनाने को कहा है।

ग्रेटर नोएडा फेज टू में 17 लाख आबादी बसाने की बात कही गई है। एनसीआर ने सवाल उठाया है कि यह आबादी कैसे बसाई जाएगी। इसके साथ-साथ जनसंख्या घनत्व कम रखा गया है। इससे भूमि अधिग्रहण अधिक होगा। इसे लेकर भी आब्जेक्शन है। ग्रेटर नोएडा एनसीआर का मेट्रो सेंटर है। यहां रीजनल प्लान के मुताबिक 2011 तक सात लाख और 2021 तक 12 लाख आबादी होनी थी। 2011 की जनगणना के मुताबिक यहां केवल 1.2 लाख आबादी है। ऐसे में ग्रेनो फेज टू और यमुना में 52 लाख लोगों को कैसे बसाया जाएगा? इस सवाल को लेकर एनसीआर पीबी ने आपत्ति जताई है। सबरीजनल प्लान से जुड़े अफसर अब कंसलटेंट कंपनी से इस बारे में बातचीत कर रहे हैं। उधर प्लान में हो रही देरी से सभी प्रोजेक्ट में देरी होगी। ग्रेनो में लेट होगा कामग्रेटर नोएडा में मास्टर प्लान एप्रूवल को लेकर काम ठप पड़ा है। नोएडा एक्सटेंशन के साथ-साथ ग्रेटर नोएडा के दूसरे हिस्सों में प्रोजेक्ट बंद हैं। एनसीआरपीबी ने ग्रेटर नोएडा के मास्टर प्लान पर आठ आब्जेक्शन लगाए थे। ग्रेनो प्राधिकरण की जीएम प्लानिंग नीलू सहगल बताती हैं कि इन्हें सही कर शासन को भेज दिया गया है। अब अगली कार्रवाई शासन स्तर पर होगी। यूपी के सबरीजन प्लान में कौन-कौन से हैं जिले

गौतबुद्धनगर, गाजियाबाद, पंचशीलनगर, बुलंदशहर, मेरठ, बागपत

सबरीजनल प्लान पर अधिकांश आपत्ति डाटा को लेकर है। इसके साथ-साथ यमुना और ग्रेनो में आबादी को लेकर भी कुछ सवाल हैं। डेंसिटी को लेकर कोई भी फैसला शासन स्तर पर हो सकता है। इस संबंध में दिल्ली और शासन के बीच ही निर्णय लिया जाएगा। निकुंज जौहरी, सहायक नियोजक, एनसीआर यूपी सेल------------------

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