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प्रधानमंत्री के स्वागत में फौरी तैयारियां जोरों पर

हरियाली पसरे इसलिए गमले सहित पौधे जमीन में गाड़े जा रहे हैं। उखड़े फुटपाथों को ठोंक-पीट कर ठीक किया जा रहा है। सड़कों के दोनों तरफ पेंट करने का काम भी चालू है। यह सब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के दौरे की स्वागत तैयारियों का हिस्सा है। मानेसर में इतनी हलचल स्थानीय लोगों व उद्योगपतियों ने कभी नहीं देखी। कॉमनवेल्थ गेम्स की तर्ज पर तैयारियां हो रही हैं लेकिन मूल समस्याएं यथावत हैं।

देश के किसी प्रधानमंत्री की संभवतया यह पहली मानेसर यात्रा है। इसी हफ्ते शुक्रवार को प्रधानमंत्री मानेसर इंडस्ट्रियल एरिया में इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स का उद्घाटन करेंगे। इससे पहले मुख्यमंत्री व अन्य केंद्रीय मंत्रियों के दौरे मानेसर में हैं। मानेसर में सेक्टर आठ में शुरू हुए उद्योगों के बाद अब कुल 2150 प्लॉट्स हो गए हैं लेकिन लगभग एक तिहाई प्लॉट्स पर ही औद्योगिक इकाइयां चल रही हैं। मूलभूत सुविधाओं की कमी व सरकारी नियम कानूनों से सहमत न होने के चलते पिछले कुछ सालों में काफी इकाईयां बंद हो चुकी हैं। फिलहाल सेक्टर तीन में ही कायदे से औद्योगिक इकाइयों की गतिविधियां नजर आती हैं। आईएमटी में बिजली की कमी सबसे बड़ी समस्या है। एक दिन में छह से 12 घंटे तक कटौती होती है। स्ट्रीट लाइट न जलने से असुरक्षा की भावना उद्यमियों में काफी है। पुलिस की चौकियों व पोस्ट ऑफिस की मांग लंबे समय से चल रही है। औद्योगिक क्षेत्र के पास अपना फायर स्टेशन व पोस्ट ऑफिस भी नही है। उद्यमी व आईएमटी इंडस्ट्रियल एसोसिएशन की सदस्य अमीना शेरवानी कहती हैं कि मेंटेनेंस चाजर्, टैक्स व इन्हैन्समैंट देने के बावजूद हमें मूल सुविधाएं तक नसीब नही हैं। प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए किए जा रहे प्रबंध भी अस्थायी हैं और यह रौनक उनके जाने के बाद नहीं टिकने वाली। 

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