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टिकट लेस ट्रैवल की पटरी पर दौड़ती भारतीय रेल

मोबाइल फोन महज इंटरनेट, मेल चेक करने अथवा बातचीत का जरिया भर नहीं रहेगा। इसके सहारे आप रेल यात्राएं भी करेंगे। खास बात यह है कि उक्त सुविधा महज हाईटेक और विशिष्ट वर्ग तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि जल्द ही साधारण श्रेणी (जनरल क्लास) में सफर करने वाले करोड़ों लोग मोबाइल की मदद से रेल का सफर कर सकेंगे। टिकट खरीदने के लिए उन्हें काउंटरों पर लगने वाली लंबी लाइन में नहीं खड़ा होना पड़ेगा यह काम उनका मोबाइल करेगा। रेलवे की ओर से भेजा गया एसएमएस ही वैध टिकट माना जाएगा।

इसके लिए उन्हें रेलवे में अपना एक एकाउंट खोलना होगा। मोबाइल पर यात्रा का विवरण लिखकर रेलवे को भेजना होगा। टिकट का पैसा उनके एकाउंट से स्वत: कट जाएगा। मोबाइल से एक अथवा इससे अधिक टिकटें खरीदी जा सकेंगी। हांलाकि रेलवे उक्त समस्त यात्राियों के मोबाइल पर एसएमएस भेजेगी। जिसे दिखाकर वह यात्रा कर सकेंगे। इस सेवा से सालना 720 करोड़ लोगों को फायदा होगा जोकि लंबी दूरी की मेल-एक्सप्रेस की साधारण क्लास में सफर करते हैं। इसके अलावा उपनगरी सेवा (मुंबई, चैन्नई, कोलकाता) के दैनिक यात्राियों को भी इसका फायदा होगा।

सेंटर फॉर रेलवे इनफॉरमेंशन सिस्टम (क्रिस) के एमडी विक्रम चोपड़ा ने ‘हिंदुस्तान’ को बताया कि विभाग ट्रेन के सफर को ‘टिकटलेस’ बनाने का प्रयास कर रहा है। जिससे स्टेशनों के काउंटर की भीड़ को समाप्त किया जा सके। उन्होंने कहा कि पिछले साल मुंबई में मोबाइल से अनारक्षित टिकट खरीद का पॉयलट प्रोजेक्ट सफल रहा है। रेलवे के कंप्यूटर सिस्टम में जरुरी बदलाव किए जा रहे हैं। पैसों के लेन देन के लिए आईआरसीटीसी अथवा किसी सरकारी एजेंसी के साथ समझौता होने के पश्चात उक्त योजना को लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दो तीन महीने में रेल मंत्रलय को यह प्रस्ताव भेज दिया जाएगा।

रेल मंत्रलय पिछले साल आरक्षित ई टिकटिंग सिस्टम में एसएमएस सेवा शुरू कर चुका है। इस योजना में यात्राी मोबाइल से आरक्षित ई टिकट खरीद सकते हैं। खास बात यह है कि ई टिकट का प्रिंट लेने की जरुरत नहीं बल्कि रेलवे का एसएमएस ही यात्रा के लिए वैध माना जाता है।
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यूटीएस (अनारक्षित टिकट सिस्टम) में मोबाइल सेवा शुरू होने से प्लेटफार्म टिकट की मोबाइल से खरीदना संभव होगा। मोबाइल से प्लेटफार्म टिकट खरीदने का पॉयलट प्रोजेक्ट चार साल पहले बंगलुरू में हो चुका है। लेकिन अभी तक रेलवे के सॉफ्टवेयर में परिवर्तन नहीं होने के कारण इसे देशभर में लागू नहीं किया जा सका।

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