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हाफिज सईद के बहाने

सेना मुख्यालय के ठीक सामने वाले होटल के एक बड़े हॉल में वह बैठा हुआ था और सभी लोगों की नजरें उस पर टिकी हुई थीं। लोग बड़े आदर के साथ उससे हाथ मिला रहे थे और कुछ तो उसके हाथ चूम भी रहे थे। उसके चेहरे पर कोई तनाव नहीं था। स्थानीय और विदेशी पत्रकार उससे बात करने के प्रयास कर रहे थे, लेकिन वह अपने समर्थकों से बात कर रहा था। कुछ दिनों पहले अमेरिका ने उसकी गिरफ्तारी या गिरफ्तारी में मदद देने पर एक करोड़ डॉलर यानी करीब 90 करोड़ रुपये के इनाम की घोषणा की थी। एक पत्रकार मित्र ने मुझसे कहा, ‘यार, अमेरिकी दूतावास से केवल 45 मिनटों के फासले पर मेरे सामने एक करोड़ डॉलर का इनाम बैठा है और मैं कुछ नहीं कर पा रहा हूं।’ उस समय शायद कई लोग ऐसा सोच रहे थ, क्योंकि वह बैठा भी अपने करीबी मित्रों के दफ्तर, यानी सेना मुख्यालय के पास था। यह सब देखकर मैं अपने प्रिय देश के बारे में बहुत दुखी हूं। हमारी पीढ़ी के लोगों ने इस देश को हमेशा जंग की हालत में देखा है। हमारे देश के आम नागरिक बिल्कुल सुरक्षित नहीं हैं। अगर कोई सुरक्षित है, तो वह दुनिया का सबस बड़ा आतंकवादी और चरमपंथी है, जिसने हमेशा मेरे देश को ‘कंडोम’ की तरह इस्तेमाल किया है। इस उदहारण के लिए मैं माफी चाहता हूं, पर मुङो यह सब देखकर 80 के दशक वाला जनरल जिया का भयानक दौर याद आ रहा है कि किस तरह धर्म के नाम पर हमारे समाज में आतंकवाद और चरमपंथ का जहर घोला गया।  
बीबीसी में हफीज चाचड़

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