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जयपुर में बिहार महोत्सव का रंगारंग समापन

पटना। सामा-चकवा की भावपूर्ण और संगीतमय कथा के साथ बिहार के कलाकारों ने जयपुर में बिहार की संस्कृति की अमिट छाप छोड़ राजस्थान से आज विदा ले ली। समापन समारोह में उपस्थित कला संस्कृति विभाग के प्रधान सचिव अंजनी कुमार सिंह ने बेहतर सहयोग और स्नेह के लिए राजस्थान खासकर जयपुर के वासियों का शुक्रिया अदा करते हुए उन्हें बिहार के लिए आमंत्रित किया।

इस अवसर पर जवाहर कला केन्द्र के निदेशक महेन्द्र पारिख ने इतने विविध आयोजन के लिए बिहार के कला संस्कृति विभाग को बधाई दी और कहा कि वाकई बिहार के जानने समझने का इस महोत्सव ने अवसर प्रदान किया। जवाहर कला केन्द्र में आयोजित बिहार महोत्सव के आखिरी दिन रंगायन प्रेक्षागृह में मुख्य आकर्षण मुजफ्फरपुर की नृत्यांगना रंजना सरकार और अपूर्वा सृष्टि की कथक प्रस्तुति थी।

बिहार कला पुरस्कार से सम्मानित दोनों ही नृत्यांगना ने अपने नृत्य से बिहार के कला वैविध्य को राजस्थान में स्थापित कर दिखाया। पटना का रंगसंस्था कला जागरण ने सुमन कुमार के निर्देशन में गोपा का प्रदर्शन किया। मुक्ताकाश मंच पर आयोजित समापन समारोह के मुख्य आयोजन की शुरुआत पं. वासुदेव कला केन्द्र, मुजफ्फरपुर के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत सामा चकवा नृत्यनाटिका से हुई।

इस अवसर पर मनोरंजन ओझा और कविता चौधरी ने बिहार के विभिन्न शैलियों के लोकगीत प्रस्तुत कर यहां का समृद्ध लोक विरासत से लोगों को रू ब रू कराया। कल्याणी सिंह के नेतृत्व में प्रस्तुत मलोडी ऑफ बिहार में भी बिहार की पारंपरिक संगीत शैलियों का अद्धुत समंजन सुनने को मिला।

महोत्सव के अंतिम दिन बिहार के विभिन्न इलाकों से गए 50 से भी अधिक स्टाल मालिक जयपुरवासियों के लगाव से अभिभूत दिखे। चलते-चलते उन्हें बस यही अफसोस था कि थोड़ी और सामग्री लाते तो थोड़ा और बिहार की छाप छोड़ जाते।

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