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मतदाताओं को घूस-दावत दी तो होगी जेल

चुनाव के दौरान मतदाताओं को नकद या अन्य तरीके से रिश्वत देने को संज्ञेय अपराध बनाने के लिए आईपीसी में संशोधन किया जा रहा है। संशोधन धारा 171 बी और ई में किया जाएगा, जिसके बाद पुलिस को ऐसे रिश्वतखोरों को तुरंत गिरफ्तार करने का अधिकार मिल जाएगा।

मतदाताओं को रिश्वत देने को संज्ञेय अपराध बनाने का सुझाव निर्वाचन आयोग ने दिया था। इस पर गृह मंत्रालय ने काम करना शुरू किया है। मतदताओं को रिश्वत देने को संज्ञेय अपराध बनाने के लिए सीआरपीसी की पहली अनुसूची में भी संशोधन करना पड़ेगा। इसके बाद ही आईपीसी की धारा 171बी और 171ई को संज्ञेय अपराध बनाया जा सकेगा। मंत्रलय ने कहा है कि दंड विधि और प्रक्रिया भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची -3 में है। राज्य सरकार इन्हें लागू करती हैं। इसलिए इस प्रस्ताव पर राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों की टिप्पणियां मांगी गई हैं।

अभी तक चुनाव में नकद रिश्वत को अपराध माना जाता है, जिसके लिए एक वर्ष की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। लेकिन संज्ञेय न होने के कारण इसमें गिरफ्तारी नहीं होती।

वहीं, यदि कोई पैसे के बजाय मतदाताओं को दावत या भोज, मनोरंजन, शराब या अन्य वस्तुएं मुहैया कराता है तो उसके लिए उस पर सिर्फ 500 रुपये का जुर्माना लगाकर छोड़ दिया जाता है। मगर अब इनको भी रिश्वत में ही शामिल कर लिया जाएगा और ऐसे करने वाले की तुरंत गिरफ्तारी हो सकेगी। गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने पांच राज्यों में हुए चुनावों में भोज देने और मनोरंजन के साधन मुहैया कराने पर प्रतिबंध लगा दिया था। 

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