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बैटरी जो चलती है वातावरण की गर्मी से

हांगकांग पोलीटेक्निक यूनिवर्सिटी के छात्रों ने ग्रैफीन आधारित एक ऐसी बैटरी विकसित की है, जो आसपास की गर्मी को बिजली में बदल कर आपके घरेलू उपकरणों को चला सकेगी। बिजली की कमी वाले दूरस्थ इलाकों और आपातकालिक स्थिति में यह आविष्कार एक वरदान साबित हो सकता है। छात्रों का कहना है कि एक साधारण विलयन पर आधारित उनकी बैटरी बीस दिन तक बिना कोई बाहरी मदद लिए एक एलईडी लैंप को लगातार जलाती रही। पर्यावरण सम्मत यह छोटी-सी तकनीक ‘स्वचालित टेक्नोलॉजी’ की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है।

इस युक्ति के पीछे का सिद्धांत यह है कि किसी भी विलयन के आयन गर्मी के कारण गतिशील होकर ऊर्जा दे सकते हैं। छात्र आविष्कारकों ने इस काम के लिए एक ग्रैफीन की पट्टी लेकर उसे कुछ तारों  द्वारा एक एलईडी बल्ब से जोड़ दिया। इस प्रकार तैयार किए गए सर्किट को उन्होंने ग्रैफीन वाले हिस्से की तरफ कॉपर क्लोराइड के विलयन में डाल दिया। जब उन्हें स्पष्ट परिणाम नजर नहीं आया तो उन्होंने इस प्रकार के छह सर्किट सिरीज में जोड़ दिए और बल्ब तुरंत जल उठा। इसका मतलब कि एलईडी को प्रकाशित करने के लिए दो बोल्ट की बिजली तैयार हो चुकी थी।

इसके पीछे की वैज्ञानिक और तकनीकी प्रक्रिया को इस आविष्कारक दल के मुखिया जिहान जू ने कुछ इस प्रकार समझाया। इस विलयन के कॉपर आयन तीन सौ मीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से गति करते हैं। यह गति कमरे के सामान्य ताप पर भी उपलब्ध होती है। जब ये आयन ग्रैफीन की पट्टी से टकराते हैं तो इस टक्कर से पैदा होने वाली ऊर्जा के कारण ग्रैफीन की सतह पर उभर आए इलेक्ट्रॉन अपने स्थान से बाहर फेंक दिए जाते हैं। इस प्रकार र्निबध हुए इलेक्ट्रॉन के सामने दो विकल्प होते हैं। या तो यह इलेक्ट्रॉन कॉपर आयन से संबद्ध हो जाता है, अन्यथा ग्रैफीन की सतह पर आगे बढ़ता हुआ वहां लगे सर्किट में प्रवाहित हो जाता है। परंतु विलयन के मुकाबले ग्रैफीन की सतह पर चलना इलेक्ट्रॉन के लिए कम रुकावट वाला होता है। अत: अधिकांश इलेक्ट्रॉन सर्किट में प्रवाहित होने लगते हैं, जिससे एलईडी को विद्युत प्रवाह मिलता है।

कुछ लोगों ने इस विद्युत धारा का स्त्रोत आस-पास की गर्मी के होने पर संदेह जताया है। उनका कहना है कि यह विधि अव्यावहारिक और तर्कहीन है। इस पर विद्यार्थी आविष्कारकों ने यह प्रदर्शित किया कि विलयन को गर्म करने पर विद्युत विभव में वृद्धि होती है। एक खास बात यह भी है कि अल्ट्रासाउंड के प्रयोग से भी बिजली की मात्रा में बढ़ोतरी देखी गई है।

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  • Web Title:बैटरी जो चलती है वातावरण की गर्मी से