DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

एक और मर्सिया!

ऐसा नहीं है कि मुझे शाकुंतलम के बंद होने की भनक बिल्कुल नहीं लगी थी। उस खबर को मैंने अफवाह समझकर टाल दिया था, क्योंकि दिल्ली कॉफी हाउस के बारे में भी ऐसी अफवाहें कई बार सुन चुका था कि अब बंद हुआ कि तब बंद हुआ। लेकिन कॉफी हाउस अब भी है, मोहन सिंह पैलेस के छत्ते पर और आए दिन वहां रौनक भी रहती है। नए-पुराने लोगों का जमावड़ा तो होता ही है वहां, गाहे-ब-गाहे। बहरहाल, शाकुंतलम के बंद होने के बाद मुझे समझ में नहीं आ रहा कि अब दिल्ली में फिल्में कहां देखूंगा? सभी सस्ते और टिकाऊ सिनेमा हॉल बंद होते जा रहे हैं संगम, चाणक्य, पारस, सावित्री..न जाने अगली बारी किसकी है? तो क्या हम जैसे लोग, लैपटॉप या पीसी पर ही फिल्में देख सकेंगे? लेकिन शाकुंतलम आखिर बंद क्यों हुआ? बताया जा है कि उसे बंद इसलिए कर दिया गया, क्योंकि वह लगातार घाटे में चल रहा था, अक्सर लागत भी निकालनी मुश्किल हो जाती थी। मैं यह नहीं कहता कि यह बात बारह आने सही है, गलत भी हो सकती है। लेकिन क्या यह सही नहीं कि अक्सर ऐसी चीजें आर्थिक कारणों से दम तोड़ देती हैं- पत्रिकाएं, अखबार, रिसर्च संस्थान, नाटक मंडली, सहकारी योजनाएं और भी बहुत सी चीजें। शायद अब समय आ गया कि ऑल्टरनेटिव की चाह रखने वालों को ऐसी चीजों को मन और धन, दोनों से सहयोग करना होगा। वरना इसी तरह हम मर्सिया पढ़ते रह जाएंगे, जैसे हममें से बहुत सारे लोग शाकुंतलम को लेकर कर रहे हैं! 
मोहल्ला लाइव में महताब आलम

 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:एक और मर्सिया!