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सरकार से न होगी बात, कल से फिर जलत्याग

गंगा सेवा अभियानम् ने रविवार को तपस्थली लालीघाट पर जो घोषणा की, वह सरकार के गले की फांस बन सकती है। सरकार की पहल के बाद जल ग्रहण करने वाले पर्यावरणविद् स्वामी ज्ञानस्वरूप ‘सानंद’ ने पुन: जलत्याग की घोषणा की है।  वह जलत्याग तपस्या मंगलवार 10 अप्रैल से शुरू करेंगे। स्थान और समय के बारे में कुछ नहीं बताया।

सरकार की वादाखिलाफी से खफा स्वामी सानंद ने कहा कि इसके पूर्व मेरी तपस्या में विघ्न डाला गया। सरकार ने मुङो 17 अप्रैल की राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण बैठक में सात सदस्यीय मण्डल में भाग लेने को आमंत्रित किया था, साथ ही मौखिक वादा किया था कि फिलहाल गंगा पर चल रहे प्रोजेक्ट रोक दिये जाएंगे पर ऐसा नहीं हुआ। इसलिए पुन: जलत्याग तपस्या करूंगा। बोले, मेरी तपस्या मां गंगा की अविरलता के लिए है, कहां करूंगा, कब करूंगा यह मेरा निजी मामला है। यह पूछने पर कि क्या आपकी अवस्था व स्वास्थ्य ठीक है? बोले, यह सोचना मेरा काम है न कि मीडिया का और न ही प्रशासन का।
 
अभियानम् के सार्वभौम समन्वयक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि दिल्ली में जब स्वामीजी एम्स में भर्ती थे तो केन्द्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल और केन्द्रीय राज्य मंत्री वी नारायण सामी ने वादा किया था कि पांच प्रोजेक्ट में से तीन पर कार्य बंद कर दिया जायेगा। 72 घंटे बाद, सरकार की ओर से फोन आया, काम बंद है। जब जांच की बात उठी तो कहा गया कि आपके साथ सरकारी नुमाइंदे भी जायेंगे। कब जायेंगे यह बताने में दो दिन लग गए, फिर फोन आया कि अभियानम् अकेले ही जांच कर ले।

उत्तराखण्ड की टीम ने प्रेमदत्त नौटियाल की अगुवाई में जांच की, एक प्रोजेक्ट श्रीनगर अलकनंदा पर काम चल रहा था। प्रोजेक्ट मैनेजर संतोष रेड्डी ने बताया कि कार्य रोके जाने संबंधित निर्देश नहीं मिले हैं। जबकि दूसरे प्रोजेक्ट विष्णु प्रिया पिपलकोटी के मैनेजर ने कहा कि शनिवार की रात फैक्स से निर्देश मिला, लेकिन काम लग गया है कल से रोक लगेगी। स्पष्ट है कि सरकार गंगा के प्रति उदासीन है। इसलिए 17 की बैठक में अभियानम् का प्रतिनिधिमण्डल भाग नहीं लेगा।

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