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शैलेन्द्र की मौत से सुरक्षा नियम घेरे में

ग्रेटर नोयडा में एडवेंचर मॉल में रैपलिंग के दौरान रस्सी टूटने से मारे गए उत्तरकाशी निवासी शैलेन्द्र की मौत से एडवेंचर कोर्स के सुरक्षा नियम सवालों के घेरे में आ गए हैं। शैलेन्द्र ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान एनआईएम (नेहरू इंस्टीटय़ूट ऑफ माउंटेनरिंग) से प्रशिक्षण लिया था। हालांकि एनआईएम का कहना है कि उसके यहां सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन कराया जाता है। शैलेन्द्र की यह लापरवाही गले नहीं उतर रही है।

उत्तरकाशी के चामकोट निवासी शैलेन्द्र सिंह बिष्ट पुत्र हरि सिंह ने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान से बेसिक व एडवेंचर कोर्स का प्रशिक्षण लिया था। कोर्स शैलेन्द्र ने गोमुख-कालिंदीखाल मार्ग, शिवलिंग व सतोपंथ जैसे पर्वतारोहण अभियान में पोर्टर तथा कई ट्रैक पर गाइड का काम किया। इन दिनों वह मसूरी में ट्रैकिंग एजेंसी में काम करता था। एनआईएम के पीआरओ विशाल रंजन का कहना कि एनके सेफ्टी मेजर देश के अन्य संस्थानों के मुकाबले सबसे अच्छे हैं। 18 मंजिला मॉल से बिना हेलमेट उतरने की बात समझ से परे है।

अति विश्वास और चूक हो सकता है कारण
उत्तरकाशी के जिला साहसिक खेल अधिकारी कुशाल सिंह नेगी का कहना है कि रैपलिंग के लिए जिस स्थान पर रोप बंधी हुई थी, उसका ठीक से परीक्षण न करने, रोप के कटने तथा रैपलिंग के दौरान शैलेन्द्र का अनुभवहीन अथवा अति विश्वास हादसे का कारण हो सकता है। रैपलिंग के लिए टॉप व बॉटम में तैनात स्ट्रेक्टर के बीच समन्वय न होना भी कारण हो सकता है।

रैपलिंग के नियम
रैपलिंग के लिए टॉप व बॉटम पर दो लोग तैनात होते हैं। दोनों रैपलिंग करने वाले के साथ हर कदम पर समन्वय बनाये रखते हैं। रोप की गुणवत्ता, इसका टॉप पर बंधा होना तथा रैपलिंग करने वाले व्यक्ति से रस्सी का जुड़ाव में सुरक्षा का देखा जाना जरूरी है।

बेटे की मौत का मां को पता नहीं
उत्तरकाशी। शैलेन्द्र की मौत से उनके परिवार और गांववाले  दु:खी है। साथ ही हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। शैलेन्द्र के बाद पिता और भाई शव लेने नोयडा गये हैं। घर में अकेली मां सुमित्र को बताया गया कि शैलेन्द्र को चोट आयी है। वह बेटे का इंतजार कर रही है। शैलेन्द्र की मां ने बताया कि शैलेन्द्र बचपन से ही साहसिक खेलों का शौकीन था। 

बीस हजार मिलने थे शैलेन्द्र को
शैलेन्द्र के परिवारवालों का कहना है कि मॉल पर रैपलिंग कर नीचे उतरने के बदले उसे 20 हजार रुपये मिलने थे। इसके लिए वह अपने चचेरे भाई को भी साथ ले गया था। बताया जा रहा है कि रैपलिंग के पहले शैलेन्द्र ने कई बार नीचे उतर कर प्रोटिक्स भी की थी।

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