DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

सत्र बीतने को है, नहीं मिली छात्रवृत्ति

हाईस्कूल और इंटर की परीक्षाएं कराने में व्यस्त यूपी बोर्ड विश्वविद्यालय और कॉलेज में पढ़ने वाले मेधावियों को छात्रवृत्ति देना भूल गया है। लापरवाही का आलम यह है कि आवेदन करने वाले 32 हजार से अधिक छात्र-छात्रओं के फार्मो की अब तक छंटाई ही नहीं हो सकी है।

इंटर की परीक्षा में 80 परसेंटाइल से अधिक पाने वाले और नान क्रीमीलेयर (वार्षिक साढ़े चार लाख से कम आय वाले) परीक्षार्थियों को मानव संसाधन विकास मंत्रलय (एमएचआरडी) की ओर से हर साल 11,460 छात्रों को 10-10 हजार रुपये छात्रवृत्ति के रूप में दिए जाते हैं। यह उन्हीं मेधावियों को दी जाती है, जिन्होंने किसी विश्वविद्यालय या कालेज के रेगुलर पाठय़क्रमों में दाखिला लिया है। छात्रवृत्ति बांटने की जिम्मेदारी यूपी बोर्ड को दी गई है। परीक्षार्थियों से 31 अक्तूबर, 2011 तक आवेदन मांगे गए थे।

प्रदेशभर से रिकार्ड 32 हजार से अधिक छात्र-छात्रओं ने इसके लिए आवेदन किया मगर पांच महीने से अधिक का समय बीतने के बावजूद फार्मो की छंटाई का काम भी पूरा नहीं हो सका है। छंटाई के बाद यदि किसी छात्र के आवेदन पत्र में कमी रहती है तो बोर्ड उसे सूचित करता है और संशोधन के बाद फाइनल लिस्ट जारी होती है। वास्तविकता यह है कि बोर्ड को इतने आवेदन की अंदाजा नहीं था। 2008 से शुरू हुई छात्रवृत्ति योजना के लिए इससे पहले बोर्ड को कभी इतने आवेदन नहीं मिले थे। 2010 में महज 7042 छात्रों ने आवेदन किया था जिसमें से 5300 आवेदक योग्य पाए गए थे।

आवेदन करने वाले मेधावी परेशान
2011 में आवेदन करने वाले जिन मेधावियों ने स्नातक में प्रवेश लिया था वे प्रथम वर्ष की परीक्षा दे रहे हैं लेकिन छात्रवृत्ति के बारे में कोई सूचना नहीं है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में स्नातक प्रथम वर्ष की छात्र निधि पांडेय हों या एडीसी के छात्र मो. आकिब या फिर कानपुर विवि से संबद्ध कालेजों में पढ़ने वाली सावित्री सिंह, अमित कुमार साहू, अंजलि सिंह या गरिमा पांडेय, किसी को इस बारे में कोई सूचना नहीं है।

रिन्यूवल करवाने वालों को भी नहीं मिला पैसा
एमएचआरडी स्कालरशिप के लिए रिन्यूवल करवाने वालों को भी पैसे नहीं मिल सके हैं। सावित्री देवी शंकर लाल शर्मा महाविद्यालय (मढ़वा, करछना) की छात्र रश्मि साहू को जुलाई 2010 में एक बार छात्रवृत्ति मिली थी। इसके बाद उन्होंने दिसम्बर 2011 में रिन्यूवल के लिए आवेदन किया लेकिन अब तक बोर्ड की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है। छात्रवृत्ति के रूप में स्नातक में 10 हजार प्रतिवर्ष और परास्नातक में 20 हजार प्रतिवर्ष मिलते है।

बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट प्राथमिकता
फिलहाल हमारी प्राथमिकता बोर्ड परीक्षा और रिजल्ट देना है। आवेदन करने वाले मेधावियों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। जल्द ही उनके बैंक एकाउंट में स्कॉलरशिप की राशि पहुंच जाएगी।
बासुदेव यादव, यूपी बोर्ड सचिव और माध्यमिक शिक्षा निदेशक

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:सत्र बीतने को है, नहीं मिली छात्रवृत्ति