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ममता को अब राज्य सरकार करेगी मानदेय का भुगतान

सरकार ममता को मानदेय देगी। आठ से दस महीनों से मानदेय से वंचित ममता के लिए स्वास्थ्य विभाग ने राशि आवंटित कर दिया है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के तहत प्रसव के दौरान जच्च-बच्चा की देखभाल के लिए ममता की व्यवस्था की गई है।

प्रदेश के करीब 500 अस्पतालों में 24 घंटे प्रसव की सुविधा बहाल है। इन अस्पतालों में 4200 ममता तैनात हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में दो से तीन, रेफरल और अनुमंडल अस्पतालों में पांच से सात और जिला अस्पतालों में आठ से दस की संख्या में ममता कार्यरत हैं। इनका काम माताओं को प्रेरित कर प्रसव के एक घंटे के अन्दर बच्चाे को दूध पिलाना है। छह महीने तक सिर्फ स्तनपान कराने के लिए प्रोत्साहित भी करना है। एक प्रसव पर ममता को 100 रुपए मानदेय मिलता है।

अब तक सभी जिला और अनुमंडल अस्पतालों में तैनात ममता के मानदेय का भुगतान नार्वे इंडिया पार्टनरशिप इनिसिएटिव (नीपी) करता था। नीपी के तकनीकी और आर्थिक सहयोग से ही ममता योजना की शुरुआत हुई थी। नीपी ने निर्णय किया है कि वह सिर्फ शेखपुरा, जहानाबाद और नालंदा जिले के अनुमंडल और जिला अस्पतालों में तैनात ममता को मानदेय देगा। इस निर्णय के ऊहापोह में आठ से दस महीने तक 35 जिलों के अनुमंडल और जिला अस्पतालों में तैनात 599 ममता का मानदेय अटका पड़ा था। इनके लिए 1.80 करोड़ रुपए का आवंटन हुआ है। 

ममता की मेहनत का ही परिणाम है कि प्रसव के एक घंटे के अन्दर राज्य की 80 फीसदी माताएं बच्चों को दूध पिला रही हैं। दो वर्ष पूर्व (2009 में) पहले घंटे में मात्र 38 फीसदी बच्चे ही स्तनपान कर पाते थे। मातृ शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सरकारी अस्पतालों में प्रसव पूर्व जच्च-बच्चा की देखभाल के लिए आशा और प्रसव उपरान्त देखभाल के लिए ममता की तैनाती हुई है।

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