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प्रयोग सफल, श्रीविधि की अब विधिवत लांचिंग

प्रयोग के तौर पर राज्य में पिछले वर्ष शुरू की गई धान की खेती की श्री तकनीक उम्मीदों पर खरी उतरी। अब सरकार ने इसकी  विधिवत लांचिंग करने का फैसला किया है। इसबार किसानों से लेकर अधिकारियों तक को प्रशिक्षित किया जाएगा। साथ ही खेतों में प्रत्यक्षण और फसल जांच कटनी प्रयोग का प्लान भी तैयार किया गया है।

अभियान की शुरुआत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल में 13 अप्रैल को करेंगे। समारोह में पिछले वर्ष बेहतर प्रदर्शन करने वाले हर प्रखंड के तीन किसानों के साथ दूसरे प्रगतिशील किसानों को भी बुलाया जाएगा।

सरकार इसबार श्री तकनीक की लांचिंग पूरे तामझाम से करेगी। इस नई तकनीक के विस्तार के साथ खरीफ उत्पादन को बढ़ाने के लिए इससे जुड़ी कई योजनाएं एक साथ शुरु की जाएंगी। विकास आयुक्त सह कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक कुमार सिन्हा ने सभी जिला कृषि पदाधिकारी और आत्मा के परियोजना पदाधिकारियों को पत्र लिखकर इसकी सूचना दे दी है।

प्रशिक्षण का कार्यक्रम सभी जिलों में होगा। राज्यस्तरीय कार्यशाला का आयोजन राजधानी में होगा। इसके तहत बीजोपचार और पौधशाला तैयार करने की विधि से लेकर रोपनी तक का प्रशिक्षण किसानों और मास्टर ट्रेनरों को दिया जाएगा। श्री धान के लिए चिन्हित जिलों के साधन सेवी किसान, जीविका के जिला प्रतिनिधि, कृषि विज्ञान केन्द्रों के वैज्ञानिक के अलावा अनुमंडल स्तर तक के कृषि अधिकारी भाग लेंगे।

विकास आयुक्त श्री सिन्हा ने बताया कि राज्य सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। खाद्य सुरक्षा के मामले में देश को बिहार से जो अपेक्षा है, उसपर भी खरा उतरने का संकल्प है सरकार का। लिहाजा टेस्ट के दौरान उत्पादन बढ़ाने में सफल रही खेती की इस नई विधा को पूरी तरह अंगीकार कर लिया गया। अब इसके विस्तार पर काम शुरू होगा।

श्री तकनीक का लाभ
कम बीज और सिंचाई की जरूरत, बिचड़ा का शीघ्र स्थापित होना, अनावश्यक वानस्पतिक वृद्धि नहीं, खरपतवार का बेहतर उपयोग, कार्बनिक और जैविक खादों के प्रयोग से बेहतर रिजल्ट और स्वस्थ पौधे

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