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ये तो मेरे जीन का कमाल है : जितेन्द्र

ये तो मेरे जीन का कमाल है : जितेन्द्र

जंपिंग जैक अभिनेता जितेन्द्र को देख कौन कहेगा कि कल उन्होंने अपना 70वां जन्मदिन मनाया है।

आपको देख लगता कि ये आपका 70वां साल नहीं, 17वां साल है। अपनी फिटनेस कैसे मैनेज करते हैं?
इसका क्रेडिट मैं अपने जीन को देता हूं, क्योंकि आजकल के एक्टर्स लुक्स को लेकर जितने सतर्क रहते हैं, पहले वैसा नहीं था। स्टारडम आया, मेंटेनेंस खत्म।

तुषार और एकता पर आपके विचार?
तुषार में कई वह क्वालिटी हैं, जो मुझमें नहीं है। जैसे मैं हाइपर हूं और वह कूल है। एकता मेरी पहली संतान है, इसलिए मेरा प्यार उसके लिए ज्यादा है। उसमें थोड़ा टेम्पर है, लेकिन वह इसलिए क्योंकि वह अपने काम को सौ प्रतिशत देती है।

क्या आपके माता-पिता चाहते थे कि आप एक्टर बनें?
कोई च्वाइस नहीं थी, पढ़ाई में जीरो था। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। पिताजी का चाचा के साथ आर्टिफिशियल ज्वेलरी का काम था। ऐसे ही एक दिन शांता राम जी के सेट पर मैंने एक आदमी से कहा कि मैं शूटिंग देखना चाहता हूं, उसने कहा कि हम शूटिंग देखने नहीं देते। शूटिंग देखना है तो काम करना होगा। फिर उन्होंने मुझे जूनियर आर्टिस्ट का रोल दिलवा दिया।

उसके बाद एक दिन मैंने शांताराम जी से हिम्मत जुटा कर कहा कि मैं फिल्मों में काम करना चाहता हूं। बाद में मुझे एक्स्ट्रा की तरह उन्होंने रिक्रूट कर लिया।

जितेंद्र नाम किसने दिया?
शांतारामजी ने। उस समय एक्टर रविंद्र कपूर थे, जो पंजाब में काफी मशहूर थे, इसलिए मैं रवि कपूर नाम नहीं रख सकता था।

आपका उजला-उजला कांबिनेशन काफी हिट था, इसका आइडिया कहां से आया?
इसकी वजह यह है कि मैं अपने वेट को लेकर काफी सजग था। गहरे रंग के कपड़े में आदमी ऐसे भी दुबला लगता है, लेकिन मैं यह दिखाना चाहता था कि मैं सच में स्लिम हूं।

आपको जंपिंग जैक क्यों कहते थे?
पता नहीं क्यों, एक ने शुरू किया होगा, फिर सब कहने लगे।

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