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पढ़ाई के जुनून के आगे बौनी हुई उम्र

पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती, बस जरुरत होती है उस जुनून की, जो उम्र को हावी न होने दे। इसके उदाहरण हैं प्रहलाद चौधरी, जो उम्र में तो 50 पार कर रहे हैं, मगर पांचवी की परीक्षा दे रहे हैं।

सतना जिले के खूंथी प्राथमिक विद्यालय में बच्चों के बीच एक अधेड़ को परीक्षा देते देख हर कोई चौंक उठता है, मगर उनके हौसले को भी दाद देने से कोई नही चूकता। प्रहलाद की बचपन से पढ़ने की इच्छा थी, मगर आर्थिक तंगी ने उन्हें ऐसा नहीं करने किया।

आम आदमी की तरह प्रहलाद भी उम्र और जिम्मेदारियां बढ़ने पर जिंदगी की समस्याओं की गलियों में खो गए। वक्त गुजरने के साथ उनका पढ़ने का सपना भी गुम गया। प्रहलाद की बेटियों को यह  नागवार गुजरता था कि उनके पिता अनपढ़ हैं। फिर क्या, बेटियों ने प्रहलाद पर दबाव डाला और पढ़ने के लिए मजबूर कर दिया।
 
प्रहलाद बताते हैं कि आर्थिक तंगी के चलते वह समय पर पढ़ाई नहीं कर पाए, मगर बेटियों के दबाव में अब वह अपनी हसरत पूरी कर रहे हैं। पांचवी की परीक्षा दी है। आगे भी पढ़ाई जारी रखने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

प्रहलाद की बेटी राजकुमारी कहती है कि पिता पढ़े-लिखे नहीं हैं, यह उन्हें अच्छा नहीं लगता था, इसलिए उसने पिता को पांचवी की परीक्षा देने के लिए कहा और वह तैयार हो गए। आने वाले समय में उनके पिता को कोई निरक्षर नहीं कह सकेगा।

प्रहलाद जिस विद्यालय में परीक्षा दे रहे हैं उसके प्रधानाध्यापक राकेश मिश्र कहते है कि प्रहलाद उन लोगों के लिए प्रेरणा हैं, जो उम्र बढ़ने पर पढ़ाई छोड़ देते हैं।

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