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चार प्रकाशकों पर 10 करोड़ जुर्माना

रांची राजीव। सरकारी स्कूलों में तय समय पर पहली से आठवीं तक के बच्चों को किताबें उपलब्ध नहीं कराना प्रकाशकों को महंगा पड़ गया। अत्यधिक देरी के कारण चार प्रकाशकों को सरकार ने प्रतिबंधित (डिबार) कर दिया है। साथ ही देरी करनेवाले प्रकाशकों पर दस करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।

झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने इस बाबत पत्र निर्गत कर दिया है। वित्तीय वर्ष 2011-12 में पहली से आठवीं कक्षा तक 45 लाख बच्चों के लिए किताबों का टेंडर जारी किया गया था। इसमें आठ प्रकाशकों को अलग-अलग जिम्मेवारी दी गई। सभी प्रकाशकों ने प्रखंड मुख्यालय तक किताब आपूर्ति करने में देरी कर दी, इसलिए राशि काटी गई। जबकि चार प्रकाशकों ने अत्यधिक देरी की, इस कारण उन्हें डिबार कर दिया गया।

पहली बार डिबार और जुर्माना का फैसला झारखंड में किताब आपूर्ति के मामले में संभवत: पहली बार एक साथ चार प्रकाशकों को डिबार और दस करोड़ रुपए से अधिक का जुर्माना लगाया गया है। हर बार देरी होने पर सिर्फ फाइन से ही प्रकाशक बच जाते थे।

सरकार के फैसले से अन्य प्रकाशकों की बढ़ी बेचैनीटेंडर में शर्त रखी गई है कि किताबें उपलब्ध कराने में विलंब होने पर जुर्माना और डिबार किया जा सकता है। वर्कआर्डर के 105 दिन के भीतर किताबों की सप्लाई हो जानी चाहिए। नतीजतन किताब सप्लाई को लेकर प्रकाशकों की बेचैनी बढ़ गई है। ’

नेशनल प्रिंटर्स ’ पीतांबरा प्रेस’ प्रिटेड कंपनी ’ आनंद पब्लिकेशनविलंब फाइनएक सप्ताह तीन प्रतिशतदो सप्ताह पांच प्रतिशततीन सप्ताह सात प्रतिशतचार सप्ताह दस फीसदीएक माह से ज्यादा 15 फीसदी चार प्रकाशकों को डिबार कर दिया गया है।

जुर्माना भी लगा है। इस बार भी किताब आपूर्ति में देरी हुई तो कड़े कदम उठाए जाएंगे। इसी कारण समय के साथ जुर्माना की रकम भी तय कर दी गई है। अरविंद विजयप्रशासी अधिकारी, जेइपीसी

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