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मूल्यांकन से रोकने पर शिक्षकों ने किया हंगामा

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में संस्थागत परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के पहले ही दिन फुपुक्टा और कानपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (कूटा) के शिक्षक नेताओं ने बवाल कर दिया। इस कारण कुछ देर के लिए मूल्यांकन कार्य ठप हो गया। इनका आक्रोश मूल्यांकन के लिए आए शिक्षकों को लौटाने का विरोध करना था। कुलसचिव से भी तीखी झड़प हुई लेकिन विरोध के कुछ देर बाद शिक्षकों को मूल्यांकन का कार्य सौंप दिया गया।

बीएनडी, वीएसएसडी और डीएसएन कॉलेज के शिक्षकों को मूल्यांकन कार्य करने से रोक दिया गया था। इन शिक्षकों को मूल्यांकन के लिए पत्र विश्वविद्यालय के स्तर से भेजे गए थे। यह जानकारी जब कूटा पदाधिकारियों को लगी तो वे विश्वविद्यालय के मूल्यांकन कक्ष तक पहुंच गए और हंगामा करने लगे।
कूटा अध्यक्ष डॉ. आरके सिंह, फुपुक्टा और कूटा के महामंत्री डॉ. विवेक द्विवेदी, डॉ. देवेन्द्र अवस्थी, डॉ. वीके दीक्षित, डॉ. विजय खरे, डॉ. आनन्द शुक्ला, डॉ. केएन मिश्र, डॉ. मोहम्मद कदीर, डॉ. राजेश कुमार और डॉ. संजय स्वर्णकार समेत बड़ी संख्या में पहुंचे शिक्षकों ने कुलपति प्रोफेसर अशोक कुमार के प्राचार्यों के पत्र पर लिखी टिप्पणी पर कड़ा विरोध जताया। विश्वविद्यालय को चेतावनी भी दी कि अगर निर्णय नहीं हुआ तो वे यहां धरने पर बैठ जाएंगे।
कुलसचिव सैय्यद वकार हुसैन भी मौके पर पहुंच गए तो शिक्षकों ने नारेबाजी शुरू कर दी। कुलसचिव ने कुलपति से मौके पर बात की। इसके बाद उन्होंने शिक्षक नेताओं से कहा कि यदि कोई शिक्षक कॉलेज से रिलीव होकर आता है तो उसे मूल्यांकन से नहीं रोका जाएगा। इसके बाद शिक्षक लौटाए गए शिक्षकों को कॉपी एलॉट कराने मूल्यांकन कक्ष तक पहुंच गए।

क्या है विवाद : कॉलेजों ने अपने प्रैक्टिकल और मौखिक परीक्षा कराने के लिए प्राइवेट परीक्षाएं न कराने और शिक्षकों को अगर वे उड़न दस्ते में हैं तो उसे कार्यमुक्त करने के लिए कुलपति को पत्र लिखा था। कुलपति ने प्राचार्यो को राहत देते हुए पत्र में इनके शिक्षकों को प्राचार्य के आदेश के बिना मूल्यांकन कार्य से रोक दिया। इस पर शिक्षक नाराज हो गए।

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