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बुझने न दें अपने अंदर की चिनगारी

हर व्यक्ति के जीवन में कुछ ऐसे क्षण आते हैं, जब वह खुद को बेहद रोमांचित पाता है। जैसे कॉलेज में आपका पहला दिन। यह जीवन के बेहतरीन दिनों में से एक है। जब आप पहले दिन कॉलेज के लिए तैयार होते हैं, आपके मन में कई तरह के ख्याल मचलते हैं। कैसा होगा कॉलेज का ऑडिटोरियम? टीचर और सहपाठी कैसे होंगे? मैं इस तरह की भावनाओं को चिनगारी कहता हूं। ये चिनगारियां ही आपके अंदर ऊर्जा का संचार करती हैं, आपके अंदर जोश भरती हैं। खुश रहने के लिए जोश और ऊर्जा का होना जरूरी है। आप जीवन के किसी भी पड़ाव पर हों,आपके अंदर की चिनगारी जीवित रहनी चाहिए। आज मैं आपको बताऊंगा कि कैसे आप अपने अंदर की ऊर्जा और जोश को जीवंत बनाए रख सकते हैं।

बचपन की मासूम खुशियां
आखिर जोश की चिनगारी कहां से शुरू होती है? मेरा मानना है कि हम चिनगारी के साथ ही जन्म लेते हैं। मैंने अपने नन्हे जुड़वां बेटों में वह चिनगारी देखी है। एक छोटा-सा स्पाइडरमैन देखकर वे बेड पर उछल पड़ते हैं। पार्क में झूला झूलते समय उनके अंदर खुशी और रोमांच का समंदर उमड़ पड़ता है। अपने जन्मदिन के कई महीने पहले से वे इसकी तैयारी शुरू कर देते हैं। केक काटने और पार्टी को लेकर उनके अंदर गजब का उत्साह दिखता है। कॉलेज के छात्रों में ऐसी ही कुछ चिनगारी नजर आती है, लेकिन इसके बाद तो मानो यह उत्साह और जोश खत्म ही हो जाता है। इससे पता चलता है कि उम्र के साथ जोश की चिनगारी धूमिल पड़ने लगती है। बॉलीवुड फिल्मजब वी मेट  में हमने शुरुआत में करीना कपूर को एक ऐसी लड़की के रूप में देखा, जिसके अंदर अपार जोश और भारी ऊर्जा है, लेकिन बाद के दृश्यों में उसके अंदर की चिनगारी धूमिल पड़ जाती है और वह निराशा के सागर में डूब जाती है। हमें इससे बचना होगा।
 
खत्म न होने दें उत्साह
हम अपने अंदर की चिनगारी को कैसे बचाए रखें? दरअसल, चिनगारी एक दीपक की लौ की तरह है। हमें इस लौ की रोशनी को बरकरार रखना होगा। साथ ही इसे आंधी-तूफान से भी बचाना होगा। अपने अंदर की ऊर्जा को बनाए रखने के लिए लक्ष्य तय करने होंगे। लक्ष्य पर काम करना जरूरी है। इसकी मंजिल को हम सफलता कहते हैं। हममें से ज्यादातर लोग मध्यम वर्ग से हैं। हमारे लिए सफलता का मतलब है वेतन बढ़ना, घर या कार खरीदना। आर्थिक उपलब्धि बड़ी सफलता है, लेकिन यह जीवन का मकसद नहीं हो सकता। अगर ऐसा होता, तो अंबानीजी रोजाना ऑफिस नहीं जाते, शाहरुख ने अब तक डांस करना बंद कर दिया होता। वे रोज क्यों काम करते हैं? क्या सिर्फ पैसे के लिए? नहीं। ऐसा नहीं है। दरअसल, रोज काम करके उन्हें खुशी मिलती है।

संयमित सफल जीवन
अगर आपके जीवन में लक्ष्य होता है, तभी आप खुद को जीवंत महसूस करते हैं। लक्ष्य तय करने का मतलब सिर्फ पढ़ाई और करियर में मुकाम हासिल करना नहीं होता। लक्ष्य तय करने का मतलब एक संयमित सफल जीवन जीना भी होता है। संयमित सफलता का मतलब है अपनी सेहत का ध्यान रखना, अपने रिश्तों को मजबूत बनाना और मानसिक शांति बनाए रखना। एक खुशहाल जीवन के लिए यह बहुत जरूरी है। अगर आपको अपने ब्रेकअप या तलाक के दिन प्रमोशन मिले, तो क्या आप खुश हो पाएंगे? अगर आपकी पीठ में चोट लगी हो, तो क्या आप कार ड्राइविंग का मजा ले पाएंगे? अगर आपका दिमाग तनाव से भरा हो, तो क्या आपको शॉपिंग करने में अच्छा लगेगा? सच्ची खुशी तभी महसूस होती है, जब जीवन में शांति और प्यार हो। अगर जीवन में सौहार्द नहीं होगा, तो आपके अंदर का उत्साह और जोश खत्म होने लगेगा।

बेवजह गंभीर न हों
अपने अंदर की चिनगारी को बनाए रखने के लिए एक और बात जरूरी है। वह यह है कि जीवन में बहुत ज्यादा गंभीर नहीं होना चाहिए। मुझसे एक टीचर ने कहा था, ‘जीवन में सीरियस नहीं, सिंसियर होना चाहिए।’ बेवजह की गंभीरता ओढ़ने से कोई लाभ नहीं होगा। बेहतर है कि हम अपने काम और अपनी जिम्मेदारियों के प्रति ईमानदार बनें। मैंने अपने काम, रिश्तों और लक्ष्य के मामले में इसका अनुसरण किया है। हर दिन मेरे लेखन के बारे में हजारों कमेंट्स आते हैं। इनमें तारीफें भी होती हैं और आलोचनाएं भी। अगर मैं हर कमेंट को गंभीरता से लूंगा, तो मेरे लिए लिखना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए बहुत ज्यादा गंभीर होने की जरूरत नहीं है। हम यहां अस्थायी रूप से आए हैं। हम एक तरह से लिमिटेड वैलिडिटी वाले प्रीपेड कार्ड की तरह हैं। अगर हम भाग्यशाली रहे, तो अगले पचास साल तक जीवित रहेंगे। पचास साल का मतलब है 2,500 वीकेंड। आखिर इतना काम क्यों करें? तो मौज करो, कुछ क्लासेज बंक करो और प्रेम करो। आखिर हम इंसान हैं, प्रोग्राम्ड उपकरण नहीं।

निराशा और अन्याय से बचो
अपने अंदर की चिनगारी को निराशा और अन्याय से बचाकर रखो। मैं जानता हूं कि विफलता को स्वीकार करना बहुत मुश्किल होता है। मेरी पहली किताब को नौ प्रकाशकों ने खारिज कर दिया था। ऐसा होता है। आईआईटी के कई छात्रों ने कम नंबर आने पर आत्महत्या कर ली। यह तो मूर्खता है। कई बार आपको लगेगा कि दूसरे आपसे ज्यादा भाग्यशाली हैं। लेकिन बेहतर यह है कि जो आपको मिला है, उसे लेकर आप खुश रहें और जो नहीं मिला, उसे स्वीकार करने की हिम्मत रखें। उम्र बढ़ने के साथ भी अपने प्रिय शौक बनाए रखें। गैरजरूरी त्याग न करें। ऐसा करने से आपके अंदर की ऊर्जा खत्म होने लगती है। खुद से प्रेम करना भी जरूरी है।
प्रस्तुति- मीना त्रिवेदी

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