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भूमिगत हो गए बुंदेली धरा के राजनीतिक सूरमा!

हुआ वही, जिसकी उम्मीद थी। बुंदेलखण्ड की धरती एक बार फिर राजनीतिक सूरमाओं की ठगी का शिकार हुई है। दलितों के घर 'बसनेर' करने वाले कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी हों या बुंदेलखण्ड को उत्तर प्रदेश का 'कश्मीर' बताने वाली मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री साध्वी उमा भारती या फिर पृथक बुंदेलखण्ड राज्य का राग अलापने वाले फिल्म अभिनेता राजा बुंदेला, चुनाव बीतने के बाद ये सूरमा इस कदर भूमिगत हुए कि बुंदेलों को उनकी आहट तक नहीं मिल रही है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव संपन्न होने तक बुंदेलखण्ड का कायाकल्प करने का दावा करने वाले राजनीतिक दलों के ये सूरमा ताबड़तोड़ दौरे व जनसभा कर यहां के शहर व कस्बे ही नहीं, बल्कि गांवों तक की धूल उड़ा दी थी, मगर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) की अगुवाई में अखिलेश सरकार के गठन के साथ ही सभी का मोह भंग हो गया।

बसपा के प्रति बुंदेली मतदाताओं की आम धारणा यही रही कि चार बार मुख्यमंत्री बनने पर मायावती कुछ नहीं कर सकीं तो अब क्या करेंगी? लेकिन कांग्रेस के राहुल गांधी के 'उठो, जागो और बदलो उत्तर प्रदेश' के नारे से बुंदेलों को कुछ ज्यादा ही उम्मीद थी, पर हार की खीझ इतनी बढ़ी कि बुंदेलखण्ड के झांसी में केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय की सदन में घोषणा करने के बाद भी आम बजट में कोई प्रावधान नहीं किया गया।

बुंदेलखण्ड को उत्तर प्रदेश का 'कश्मीर' बताने वाली उमा भारती महोबा की चरखारी सीट से विधायक तो बन गईं, लेकिन भाजपा को उबार पाने में असफल होने पर ऐसा लगता है कि वह राजनीतिक 'अज्ञातवास' में चली गई हैं।

यही हाल अरसे से पृथक बुंदेलखण्ड के गठन का राग अलापने वाले फिल्म अभिनेता और बुंदेलखण्ड कांग्रेस के अध्यक्ष राजा बुंदेला का है। झांसी की सदर विधानसभा सीट के चुनाव में उन्हें मिले मात्र 1897 मत एक बार उनको अपने राजनीतिक फैसले पर पुनर्विचार करने को मजबूर कर दिया है।

सपा के विधायक विश्वम्भर सिंह यादव कहते हैं कि प्रदेश की अखिलेश सरकार बुंदेलखण्ड के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी, किसानों की सिंचाई, खाद-बीज की समस्या या पलायन को रोकने की दिशा में कई कदम उठाए जाएंगे।

कांग्रेस के बांदा जिलाध्यक्ष साकेत बिहारी मिश्र ने बताया कि राहुल गांधी अभी दिल्ली में उत्तर प्रदेश की हार की समीक्षा और लोकसभा चुनाव की तैयारी में व्यस्त हैं। फुर्सत मिलते ही फिर बुंदेलखण्ड में डेरा डालेंगे।

महोबा जनपद की चरखारी विधानसभा क्षेत्र के मतदाता अपनी विधायक और भाजपा की तेज तर्रार नेता उमा भारती से एक माह में ही उकता गए हैं। पनवाड़ी कस्बे के व्यापारी उमेश सवाल करते हैं, ''हम अपनी विधायक (उमा) को कहां ढूढ़ें, मध्य प्रदेश या दिल्ली में? अब चुनाव के वक्त वाले मोबाइल भी बंद हैं।''

फिल्म अभिनेता और बुंदेलखण्ड कांग्रेस के संस्थापक अध्यक्ष राजा बुंदेला ने कहा कि इस चुनाव में भले ही बुंदेलों ने उन्हें और उनकी पार्टी को नकार दिया है, पर वह पृथक राज्य की मांग को लेकर पूर्व की भांति जनजागरण करते रहेंगे।

उत्तर प्रदेश विधानसभा में बसपा विधायक दल के उपनेता और बांदा की नरैनी सीट विधायक गयाचरण दिनकर का कहना है कि बसपा शासन में बुंदेलखण्ड को मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज व मान्यवर कांशीरामजी कृषि विश्वविद्यालय जैसे कई संस्थानों की सौगात मिली। प्रदेश के हर इलाके से ज्यादा यहां का विकास हुआ है। सपा लोगों को गुमराह कर सत्ता में आई है, इस सरकार से ज्यादा उम्मीद नहीं की जानी चाहिए।

कुल मिला कर यह कहना गलत न होगा कि विधानसभा चुनाव में कई तरह के सब्जबाग दिखाने वाले राजनीतिक सूरमा एक बार फिर बुंदेली धरा को ठगकर इस कदर भूमिगत हुए हैं कि शायद यहां की जनता को इनके लापता होने के इश्तहार छपवाने पड़ सकते हैं।

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