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दो टूक

विकास की पीड़ा
रवानगी-रोशनी लाने के लिए थोड़े दिनों तक दिक्कत झेलनी हो, तो किसी को शिकायत नहीं करनी चाहिए। मेट्रो के काम के लिए आईटीओ के पास और भगवान दास रोड पर होने वाली बाधा से झुंझलाने की जरूरत ही क्यों है? पिछले करीब एक दशक में मेट्रो ने काम करने का नया कल्चर दिल्ली को दिया है। अब यह पुराने दिनों की बात हो गई है कि किसी रास्ते पर काम हो रहा हो, तो वह पूरी तरह बंद हो जाता है। कुछेक घटनाएं छोड़ दें तो मेट्रो के काम में हादसे होने की आशंका भी न्यूनतम रही है। मेट्रो ने अपने अधिकतर काम तय समय से पहले पूरे किए हैं। तब क्या दिक्कत?

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