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सौ साल पूरे कर डबल पेंशन लेने वाले बढ़े

विश्व स्वास्थ्य दिवस के मौके पर इस बार नीति निर्माताओं का ध्यान बुजुर्गो की सेहत पर केंद्रित है, जो सराहनीय पहल है। लेकिन इससे भी अच्छी खबर यह है कि हमारे देश में औसत आयु बढ़ रही है। इसी का नतीजा है कि हर साल सौ का आंकड़ा पार करने वाले बुजुर्गो की संख्या भी बढ़ रही है।

देश में सौ साल तक जीने वालों का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं तैयार किया जाता है। यहां तक कि जनगणना महकमे के पास भी इसका ब्योरा नहीं है। लेकिन एक विभाग ऐसा है जिसके पास कुछ हद तक इसकी जानकारी है। वह है केंद्र सरकार का पेंशन विभाग। उसके रिकॉर्ड को देखें तो 2011 में 1675 पेंशनर थे जो 100 वर्ष की आयु पूरी कर चुके थे।
नियमानुसार इन्हें दोगुनी पेंशन देने का प्रावधान है। इसलिए ये आंकड़े पूरी तरह चौकस हैं।
पेंशन विभाग के मुताबिक जीवन की सेंचुरी लगाने वालों की संख्या एक साल में करीब 384 बढ़ गई है। 2010 में ऐसे पेंशनर सिर्फ 1291 थे। इन आंकड़ों को यदि नमूने के तौर पर इस्तेमाल करें तो देशभर में इस समय तकरीबन 2.1 लाख लोग ऐसे होंगे जो जीवन के 100 सावन देख चुके होंगे।

दरअसल, साठ साल की आयु पार कर चुके पेंशनरों (सिविल) की संख्या देश में 6,57,869 है। इनमें से 1675 शतायु हैं। यह संख्या कुल पेंशनरों की .25 फीसदी है। देश में 7.5 फीसदी आबादी 60 साल से अधिक आयु की है यानी करीब 8.6 करोड़ लोग वरिष्ठ नागरिक हैं। यदि पेंशनरों के प्रतिशत को आधार बनाकर कुल शतायु बुजुर्गो की संख्या निकालें तो यह करीब 2.1 लाख बैठती है।

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