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मेरठ में 58 फीसदी लोगों को साइकिल का सहारा

आर्थिक उन्नति व प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी के बावजूद मेरठ में 58 फीसदी घरों में आज भी साइकिल ही आने-जाने का सहारा है। तरक्की के गुलाबी आंकड़ों की पोल 2011 की जनगणना ने पूरी तरह खोलकर रख दी है। मेरठ में आठ फीसदी लोगों के पास आने-जाने के लिए निजी साधन नहीं हैं। स्कूटर, मोटर साइकिल अभी एक तिहाई घरों तक ही पहुंचा है। गांवों में कार-जीप के हॉर्न जरूर सुनाई देने लगे हैं, लेकिन वे शहर से बेहद पीछे हैं। हालांकि, तेजी से बढ़ते इस शहर में 47 हजार घरों में आवागमन के लिए साइकिल तक का सहारा नहीं है।

दुनिया में सर्वाधिक तेजी से बढ़ने वाले शहरों में शुमार मेरठ में वाहनों के इस आंकड़े का खुलासा जनगणना 2011 में हुआ है। जनगणना निदेशालय से जारी इन आंकड़ों में यूपी के हर शहर की तसवीर पेश की गई है। लेकिन मेरठ में पांच लाख 68 हजार 745 घरों में किए गए सर्वे में वाहनों के प्रयोग के जो नतीजे आए हैं वे चौंकाने वाले हैं। देश में सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ते इस शहर में अभी भी अधिकांश घरों में साइकिल ही एक जगह से दूसरी जगह तक जाने का सहारा है। मेरठ जिले में 58.4 फीसदी घरों में सिर्फ साइकिल है। यानी जनपद में तीन लाख 32 हजार 147 घरों में स्कूटर-मोटर साइकिल की आवाज अभी नहीं पहुंची है। इस शहर में तीन लाख से ज्यादा घरों में अभी साइकिल ही आने-जाने का मुख्य साधन होना वाकई चौंकाने वाला है। साइकिल के मामले में गांव सबसे आगे हैं। गांवों में 60.3 फीसदी घरों में आज भी साइकिल के अलावा अन्य कोई साधन उपलब्ध नहीं हो पाया है। शहर में 56.6 फीसदी घरों में साइकिल चलती है। मेरठ में दो पहिया वाहन सिर्फ 32.8 फीसदी घरों तक पहुंचे हैं। दो पहिया वाहनों के मामले में शहर और गांव में जमीन-आसमान का अंतर है। गांव में जहां 23.9 फीसदी घरों में ही दो पहिया वाहन पहुंचे हैं, वहीं शहर में 40.7 फीसदी घरों में दो पहिया वाहन हैं। मेरठ शहर की सड़कों पर भले ही कारों की लंबी लाइन दिखती हो, लेकिन आंकड़ों में यह तीसरे नंबर पर है। मेरठ जिले में 7.5 फीसदी घरों में चार पहिया वाहन हैं। गांव और शहर में इस संख्या में भी बड़ा अंतर है। गांव में मात्र 3.6 फीसदी घरों में चार पहिया वाहनों के हॉर्न बजते हैं, जबकि शहर में यह आंकड़ा 10.9 फीसदी है। हालांकि मेरठ में ऐसे भी घर हैं जहां आजादी के छह दशक बाद भी स्कूटर-मोटर साइकिल तो दूर साइकिल तक नहीं पहुंची है। गांव व शहर में संयुक्त रूप से 8.4 फीसदी घरों में कोई वाहन नहीं है। गांवों में 11.3 फीसदी जबकि शहर में 5.9 फीसदी घरों में आज भी आने-जाने के लिए पैदल ही विकल्प है। इन घरों में साइकिल लेने तक की क्षमता नहीं है। यानी मेरठ ने भले ही देश में तरक्की के मामले में अपनी धमक कायम कर ली हो, लेकिन आज भी 47 हजार 774 हजार घरों में साइकिल तक की घंटी नहीं बजती।


यह है मेरठ जिले में वाहनों की तरक्की का आइना
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साधन  कुल घर  मेरठ  जिला गांव  शहर
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साइकिल 568745 58.4  60.3  56.6
बाइक-स्कूटर 568745 32.8  23.9  40.7
चार पहिया 568745 7.5  3.6  10.9
कुछ नहीं  568745 8.4  11.3  5.9

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