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चलो गांव की सैर करें

हरियाणा के झज्जर में 48 साल के प्रदीप सिंह ने अपने घर को एक पर्यटन स्थल में बदल दिया है। फर्क बस इतना है कि शहरी लोगों के लिए जो पर्यटन है, वह सब प्रदीप सिंह के परिवार के लिए रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है। प्रदीप सिंह ने साल 2006 में अपने खेत का पर्यटन के लिए इस्तेमाल करना शुरू किया। सैलानी यहां आकर ट्रैक्टर की सैर करते हैं, खेत जोतते हैं, मिट्टी के चूल्हों पर रोटियां पकाते हैं और गोबर के उपले बनाने में भी मदद करते हैं।

प्रदीप सिंह के मुताबिक, ‘लोग चाहते हैं कि वे अपने बच्चों का देहात से परिचय करा सकें। वे दरअसल अपनी जड़ों से दोबारा जुड़ना चाहते हैं।’ लंबे समय से भारत का मध्यम वर्ग छुट्टियां बिताने के लिए शिमला, नैनीताल और मसूरी जैसी जगहों पर जाता रहा है। अब गांव-देहात में छुट्टियां बिताना एक नया चलन है। गांव के लोगों के लिए यह कमाई का एक नया जरिया बन गया है। भारतीय पर्यटन मंत्रलय ने भी इस तरह की योजनाओं का समर्थन किया है। मंत्रलय की वेबसाइट पर ऐसे 150 गांवों के नाम दिए गए हैं, जहां इस तरह के प्रोजेक्ट्स फिलहाल चल रहे हैं। सैलानियों के लिए इन गांवों में खास तैयारियां की जाती हैं। इस बात का ख्याल रखा जाता है कि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो। इसीलिए शहरों की तरह वेस्टर्न टॉयलेट बनाए गए हैं, हालांकि गांव में होने वाली बिजली कटौती का उन्हें सामना करना पड़ता है। लेकिन अधिकतर पर्यटकों को इससे कोई दिक्कत नहीं होती, बल्कि वे इसमें भी गांव का आकर्षण ढूंढ़ते हैं।

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