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मेट्रो और मुसीबत

दिल्ली मेट्रो राजधानी का गौरव मानी जाती है। दिल्लीवासी इसे अपनी शान मानते हैं। वैसे भी अपने देश में मेट्रो विकास की सबसे बेहतर नजीर है। इसकी कामयाबी देखकर देश के दूसरे महानगर इसे अपनाने की कोशिश कर रहे हैं, पर पिछले कुछ दिनों में मेट्रो में कई खामियां देखने को मिली हैं। ट्रेनों का धीमी गति से चलना, सुरंग में ही रुक जाना या फिर स्टेशन पर लंबे समय तक रुके रहना, जैसे आदत-सी बन चुकी है। बीते कुछ वक्त से मेट्रो स्टेशनों को मुसाफिरों ने सुसाइड प्वॉइंट बना दिया है। इन सबसे लगने लगा है कि दिल्ली मेट्रो रेल प्राधिकरण अपनी कमाई हुई विश्वसनीयता खोता जा रहा है। मेट्रो मैन ई. श्रीधरन की विदाई के बाद से राजधानी की इस शान की चमक धूमिल हुई है। ठीक है, मेट्रो के संचालन में गड़बड़ी न आए, इसके लिए यात्रायों को जागरूक बनाए जाने की जरूरत है, पर डीएमआरसी को भी तो अपनी मुस्तैदी दिखानी होगी।
बिश्वजीत मुखर्जी
bishwajeet17@yahoo.com

भ्रष्टाचार की जड़
हमारे देश में भ्रष्टाचार की जड़ें आज इतनी गहरी हो गई हैं कि बिना रिश्वत के साधारण से साधारण काम भी नहीं हो पाता। साफ है, सामाजिक संवेदनाओं, जीवन-मूल्यों और चरित्रों का ह्रास हुआ है। ऐसा लगता है, जैसे आज हर कोई बिकाऊ है। क्या नेता, क्या अभिनेता और क्या अधिकारी, सबकी कीमत तय है। इस हमाम में सारे नंगे हैं। रिश्वत, कमीशन, भाई-भतीजावाद के अलावा भी भ्रष्टाचार के कई और रूप हैं। जैसे मेरी नजर में काहिली भी भ्रष्टाचार है। महंगी शिक्षा, लचर न्याय व्यवस्था, जन जागरण का अभाव और विलासित जीवनशैली भ्रष्टाचार की ही देन हैं। अगर सचमुच इस बीमारी से निजात पाना है, तो कुछ अहम उपाय करने होंगे। हमें एक ऐसी व्यवस्था तो बनानी ही होगी, जिससे इंसानियत बची रहे।
विशाल शर्मा, पुराना बाजार   हलवाई गली, भीम नगर
vishalsharma1955@gmail.com

जरदारी का आना
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी भारत दौरे पर आ रहे हैं। भारत-पाकिस्तान रिश्तों के लिहाज से यह दौरा महत्वपूर्ण बताया जा रहा है, पर क्या जरदारी दोनों देशों के बीच की खटास को दूर कर पाएंगे? यह लाख टके का सवाल है, जो हर पाकिस्तानी प्रतिनिधि के भारत दौरे से पहले प्रासंगिक हो उठता है। हमने देखा है कि किस तरह जनरल मुशर्रफ भारत आए और हमें निराश करके चले गए। हालांकि वह वहां के चुने हुए नुमाइंदे नहीं थे, इसलिए उनसे हमारी उम्मीद बेमानी थी। लेकिन इस बार पाकिस्तान में सत्तारूढ़ पीपीपी सरकार को जनसमर्थन प्राप्त है। वह चाहे, तो कुछ प्रभावी फैसले ले सकती है। देखा जाए, तो पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के कारोबारी रिश्ते बेहतर हुए हैं। इसलिए मुमकिन है कि भारत दौरे पर जरदारी पुराना राग छोड़ेंगे और आतंकवाद के मोर्चे पर भारत का साथ देंगे।
चंदन कुमार
तिलक नगर, दिल्ली

अभिव्यक्ति का सवाल
इंटरनेट से हमारी जिंदगी आसान बन गई है। हम जब जो चाहें, इंटरनेट के जरिये पूरी हो सकती है। लेकिन इससे समाज में कई दिक्कतें भी पैदा हुई  हैं। इसमें सबसे बड़ा मुद्दा हमारी अभिव्यक्ति से जुड़ा है। संविधान ने हमें स्वतंत्र अभिव्यक्ति का हक दिया है। इसका बेजा इस्तेमाल यदा-कदा होता था। लेकिन इंटरनेट पर इस अधिकार का बड़ी तेजी से दुरुपयोग हो रहा है। सोशल मीडिया पर लोग अनाप-शनाप लिख रहे हैं। दरअसल, लोग यह भूल गए हैं कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हक तो उन्हें है, पर किसी की मानहानि का अधिकार उन्हें नहीं है।
दिलीप तिवारी
साहिबाबाद, उत्तर प्रदेश

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