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नाम का संगठन

पिछले दिनों दिल्ली में ब्रिक्स की शिखर बैठक हुई, पर यह समझ में नहीं आया कि इस बैठक से सदस्य देशों ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका को क्या मिला? कहने में यह ठीक लगता है कि सदस्य देशों के बीच आपसी कारोबार डॉलर में नहीं होंगे, बल्कि सभी देश अपनी ही मुद्रा में कारोबार करेंगे। लेकिन यह किसी भी तरह से सुविधाजनक नहीं है। दूसरी तरफ, इन बातों का अर्थ यह भी नहीं कि ब्रिक्स के देश एकजुट हैं। यह तो हम जानते ही हैं कि चीन से न भारत की पटती है और न रूस की। यानी यह साफ है कि ब्रिक्स का भविष्य सुनहरा नहीं है। जहां तक अमेरिका से इसके रिश्ते की बात है, तो चीन, रूस और ब्राजील के संबंध वाशिंगटन से कतई बेहतर नहीं कहे जा सकते। इसके ठीक विपरीत भारत और दक्षिण अफ्रीका के संबंध अमेरिका से बहुत अच्छे हैं। हालांकि गुटनिरपेक्ष दौर में हम रूस के काफी करीब हो गए थे, पर 1962 के चीन युद्ध में सोवियत संघ ने भारत की मदद नहीं की थी। अत: बेहतर यही होगा कि इतिहास से सबक लेते हुए हम अमेरिका से अपने संबंध हर हाल में मजबूत बनाए रखें। ब्रिक्स के नाम पर अमेरिका से दूरी बढ़ाना ठीक नहीं है।
अबू अर्श, 323/8, ललिता पार्क, दिल्ली

रिश्वत प्रकरण के बाद
थल सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह द्वारा रिश्वत प्रकरण को तूल देने के बाद रक्षा मंत्री ए के एंटोनी ने राज्यसभा में बयान दिया। एक तरह से रक्षा मंत्री का वक्तव्य हैरान करने वाला था। जब जनरल ने घूस की पेशकश की बात रक्षा मंत्री को बताई थी, तो फिर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई? दूसरी तरफ, जब थल सेनाध्यक्ष ने कार्रवाई नहीं की, तो रक्षा मंत्री ने इस मामले का संज्ञान क्यों नहीं लिया? इससे साफ होता है कि पूरे मामले को मामूली तौर पर देखा गया। देश की सुरक्षा के मद्देनजर इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए। और तब तक सभी पार्टियों के नेता अनर्गल बयानबाजी से बचें। यही देशहित में है।
राजन मिश्र

खेल नीति की दरकार
बीते राष्ट्रमंडल तथा एशियाई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने सफलता का नया अध्याय जोड़ा। वाकई यह हमारे लिए खेलों का स्वर्णिम युग है। क्रिकेट के अलावा भी हम और खेलों में उम्दा प्रदर्शन कर रहे हैं। परंतु झारखंड में महिला तीरंदाजी को बढ़ावा नहीं दिया जा रहा है। वहां के खिलाड़ी खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। तभी तो घर चलाने के लिए एक महिला तीरंदाज को अपना मेडल तक बेचना पड़ा है। शायद यही वजह है कि ज्यादातर खिलाड़ी क्रिकेटर बनना चाहते हैं, क्योंकि इसमें बहुत पैसा है। अगर सरकार सभी खेलों में लगातार उम्दा प्रदर्शन चाहती है, तो खिलाड़ियों की आर्थिक स्थिति सुधारनी पड़ेगी। इसके लिए  एक दूरदर्शी खेल नीति बनाई जाए।
अतुल चंद्रा

फिक्सिंग और फिल्म
मैच फिक्सिंग मामले से एक और प्रकरण जुड़ गया है। ताजा खबरों के मुताबिक, अब फिल्मी दुनिया के लोगों के भी मैच फिक्सिंग में शामिल होने की बात सामने आ रही है। हाल ही में बॉलीवुड की एक अभिनेत्री पर मैच फिक्सिंग में शामिल होने का आरोप लगा है। इसके बाद तो वह मशहूर हो गई है, अपनी अदा के लिए नहीं, बल्कि इस गैरकानूनी धंधे के लिए। जो पहचान फिल्मों से नहीं मिली, वह अब आरोप लगने से मिलने लगी है। तो क्या अब पब्लिसिटी पाने के लिए मैच फिक्सिंग की जा रही है? जिस तरह से ग्लैमर और क्रिकेट की दुनिया के बीच की नजदीकियां बढ़ी हैं, इसमें कुछ भी संभव है।
मनीष कुमार

 

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