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बाउंस करने लगे किसानों को मिले सरकारी चेक

धान बेचने वाले किसानों को मिले सरकारी चेक बाउंस करने लगे हैं। पहले धान बेचने के लिए सहकारी और सरकारी संस्थाओं के केन्द्रों पर लंबी कतार का सामना करना पड़ा अब किसानों को चेक भुनाने के लिए बैंकों में फजीहत झेलनी पड़ रही है।

चेक बाउंस होने की सूचनाएं तो कई जिलों से मिल रही है लेकिन सबसे अधिक परेशानी कैमूर जिले में है। वहां राज्य खाद्य निगम द्वारा एक माह पहले तक काटे गए चेक का भुगतान अब तक किसानों को नहीं हो पाया है।

राज्य में संस्थाएं धान की सरकारी खरीद के लिए तय लक्ष्य के करीब तो पहुंच गई हैं लेकिन उनके द्वारा दिये गए चेक का भुगतान बैंकों में नहीं हो पा रहा है। पिछले एक माह में बैंकों ने खाते में पैसे के अभाव में राज्य खाद्य निगम के दजर्नों चेक किसानों को वापस कर दिये।

कैमूर जिले में कुदरा के प्रगतिशील किसान अशोक पांडेय का एक माह पहले एसएफसी द्वारा निर्गत एक लाख 43 हजार का चेक दो बार बैंक से वापस हो गया। उसी जिले के वेरुआर गांव के जय प्रकाश उपाध्याय भी ऐसी ही समस्या से जूझ रहे हैं।

एसएफसी द्वारा उन्हें 1.71 लाख का चेक 16 फरवरी को ही निर्गत किया गया था। ऐसी घटना उस जिले के कई दूसरे किसानों के साथ तो घटी ही है दूसरे धान उत्पादक जिलों में भी कमोबेश ऐसी ही स्थिति का सामना किसान कर रहे हैं।

हालांकि सरकार ने धान की खरीद में कोई कोताही नहीं की है। किसानों ने उत्पादन में रिकार्ड बनाया तो सरकार ने खरीद में भी नया कीर्तिमान स्थापित किया। तीस लाख टन के लक्ष्य के विरुद्ध बुधवार तक लगभग 20 लाख 65 हजार टन धान की सरकारी खरीद हो चुकी है और अभियान तीस अप्रैल तक चलना है। पैक्सों ने इस मामले में सबसे अधिक सक्रियता दिखाई है तो केन्द्रीय एजेन्सी एफसीआई फिसड्डी रही है।

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