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हॉर्स ट्रेडिंग की होगी सीबीआइ जांच

झारखंड  में राज्य सभा चुनाव में हुए हॉर्स ट्रेडिंग (विधायकों की खरीद-फरोख्त) और धनबल के खेल की सीबीआइ जांच का आदेश हाइकोर्ट ने दिया है। पांच अप्रैल को प्रदीप बलमुचू और जयशंकर पाठक की याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस पीसी टाटिया और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की अदालत ने चुनाव आयोग को यह निर्देश दिया।

कोर्ट ने आदेश की प्रति भी चुनाव आयोग को भेजने को कहा है। हालांकि अदालत ने दोनों याचिकाओं को खारिज कर दिया। बलमुचू ने याचिका में चुनाव आयोग के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसके तहत राज्यसभा चुनाव को रद्द किया गया था। पाठक ने जनहित याचिका दायर की थी।

अदालत ने अपने 46 पन्ने के आदेश में कहा है कि हॉर्स , ट्रेडिंग और मनी पावर के खेल की शिकायत आयोग से प्राय: सभी राजनीतिक दलों ने की है। मीडिया रिपोर्ट में भी इसका उल्लेख है।

प्रार्थी खुद यह स्वीकार करते हैं कि आयकर विभाग ने जमशेदपुर से रांची लाए जा रहे 2.15 करोड़ रुपए एक कार से बरामद किया है और इसका उपयोग चुनाव में ही किया जाना था। सभी राजनीतिक दलों की शिकायत, मीडिया रिपोर्ट और अपने स्तर से जांच के बाद आयोग को यह महसूस हुआ कि चुनाव स्वच्छ नहीं हुआ है, तो उसने रद्द कर दिया।

अपनी सिफारिश उसने राष्ट्रपति को भेजी। सिफारिश के साथ उसने साक्ष्य भी दिए हैं। इस कारण कोर्ट चुनाव आयोग को इस मामले की सीबीआइ से जांच कराने का निर्देश देता है। 

आयोग को चुनाव रद्द करने का अधिकार
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि स्वच्छ और निर्भिक चुनाव कराना चुनाव आयोग का दायित्व है। चुनाव के दौरान यदि आयोग को यह प्रतीत होता है कि चुनाव में गड़बड़ी हुई है, तो वह संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव रद्द करा सकता है।

चुनाव रद्द और स्थगित करना आयोग का प्रशासनिक निर्णय होता है। इसके लिए वह लोगों का पक्ष नहीं सुनता है। देश में कई चुनाव आयोग ने रद्द किए हैं। लेकिन इसके लिए वह उम्मीदवारों के पक्ष को प्रमुखता नहीं देता है और न ही उनका पक्ष सुनता है।

इसलिए प्रार्थी की यह दलील की आयोग ने चुनाव रद्द करने के पहले किसी भी उम्मीदवार का पक्ष नहीं सुन नेचुरल जस्टिस का उल्लंघन किया है, खारिज की जाती है।

बलमुचू की दलील
बलमुचू ने अपनी याचिका में कहा था कि चुनाव आयोग को राज्य सभा चुनाव रद्द करने का अधिकार नहीं है। अनुच्छेद 324 में आयोग को चुनाव संपन्न कराने का अधिकार दिया गया है। आयोग पुनमर्तदान करा सकता है। लेकिन उसने बिना किसी उम्मीदवार का पक्ष सुने चुनाव रद्द कर दिया। यह नेचुरल जस्टिस का उल्लंघन है।

आयोग ने हॉर्स ट्रेडिंग और तीन मतदाताओं कांग्रेस के केएन त्रिपाठी, राजद के सुरेश पासवान और झामुमो के विष्णु भैया द्वारा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए अपना बैलेट पेपर अपनी पार्टी के अधिकृत प्रतिनिधि के अलावा दूसरे लोगों को दिखाने को आधार बनाते हुए चुनाव प्रक्रिया रद्द करने की अनुशंसा कर दी थी।

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