DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बाघ की दहशत से बागवानी शोध ठप्प

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ग्रामीण इलाकों में पिछले करीब 115 दिनों से घूम-घूमकर कई पशुओं का शिकार कर चुके बाघ से न सिर्फ ग्रामीण डरे हुए हैं, बल्कि केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान में भी उसकी दहशत है, जिस कारण शोध कार्य ठप्प पड़े हैं। बाघ के डर से संस्थान के वैज्ञानिक और कर्मचारी बगीचों में नहीं जा रहे हैं।

आम बेल्ट के नाम से मशहूर लखनऊ के रहमानखेड़ा इलाके में स्थित केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान में आम की अम्बिका, अरुनिका, दशहरी, लंगड़ा, चौसा, आम्रपाली और मल्लिका जैसी प्रजातियों के उत्पादन और नई किस्मों के लिए शोध कार्य होता है। लेकिन इसी साल की सात जनवरी से बाघ ने रहमानखेड़ा क्षेत्र को अपनी शरणस्थली बना रखा है, जिससे यहां के 46 वैज्ञानिकों और 300 कर्मचारियों में दहशत है। बाघ को कई बार बगीचे में देखा जा चुका है।

संस्थान के निदेशक एस. रविशंकर ने कहा, ''बाघ की दहशत के कारण जनवरी माह से संस्थान का शोध कार्य रुका पड़ा है। वैज्ञानिक और कर्मचारी काम करने से डर रहे हैं। कई ने तो अपनी सुरक्षा के लिए निजी सुरक्षागार्ड तक रख लिए हैं।''

रहमानखेड़ा और आस-पास के इलाकों में बाघ ने अब तक करीब 25 पशुओं को अपना शिकार बनाया है। वन विभाग भी बाघ के सामने लाचार है। उसे पकड़ने की हर कोशिश नाकाम हो रही है। बाघ ने हालांकि अभी तक किसी इंसान को अपना शिकार नहीं बनाया है। माना जा रहा है कि यह बाघ लखीमपुर खीरी के जंगलों से भटकर इधर आया है।

रविशंकर ने कहा, ''हमने वन विभाग को तीन बार पत्र लिखकर बाघ को जल्द पकड़ने मांग की है, लेकिन हमें बार-बार सिर्फ आश्वासन मिला कि बहुत जल्द बाघ को पकड़ लिया जाएगा।''

करीब 300 एकड़ में फैले केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान में आम के आलावा अमरूद, आंवला, बेल और जामुन की नई प्रजातियों के लिए भी शोध होता है।

वहीं, प्रभागीय वन अधिकारी अशोक मिश्रा ने कहा, ''बाघ को पकड़ने के लिए प्रभावी कोशिशें की जा रही हैं। कई विशेषज्ञों की मदद भी ली जा रही है। बाघ कई बार हमारे चंगुल में फंसते-फंसते बचा है। उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में इसे पकड़ लिया जाएगा।''

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:बाघ की दहशत से बागवानी शोध ठप्प