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सेना की साख पर नहीं कोई सवाल

जनवरी के मध्य में सेना की असामान्य गतिविधियों को लेकर विद्रोह की अटकलों को सरकार ने बेबुनियाद करार दिया है। केंद्र सरकार ने बुधवार को साफ किया कि सेना ने विद्रोह की कोशिश नहीं की। साथ ही, कहा कि सेना और सशस्त्र बलों पर पूरा विश्वास है कि वे लोकतंत्र को कमजोर करने वाला कदम कभी नहीं उठा सकते।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी ने मीडिया रिपोर्ट को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह डर फैलाने वाली है। राष्ट्रपति भवन में पद्म पुरस्कार वितरण समारोह के बाद प्रधानमंत्री ने सरकार और सेना प्रमुख के बीच किसी भी तरह की तनातनी से इनकार किया। उन्होंने कहा, ‘सेना प्रमुख का पद गरिमापूर्ण है। हम सबका दायित्व है कि इसकी मर्यादा को कम करने वाला कोई काम नहीं करें।’

उधर, विशाखापट्टनम में एक कार्यक्रम में रक्षा मंत्री ने विद्रोह की कोशिश की आशंकाओं को बेबुनियाद ठहराते हुए कहा कि इस तरह के मुद्दे राष्ट्रीय सुरक्षा और सशस्त्र बलों को प्रभावित करते हैं। ऐसे विवादों को कतई हवा नहीं दी जानी चाहिए जो सशस्त्र बलों की गरिमा और सम्मान को ठेस पहुंचाते हैं। एंटनी ने सेना में पूर्ण विश्वास जताते हुए कहा कि हमें उनकी देशभक्ति पर पूरा भरोसा है। यह पूछने पर कि इससे पहले आखिरी बार ऐसी गतिविधि कब संचालित हुई थी, एंटनी ने कहा कि सेना ने अपनी स्थिति पहले ही स्पष्ट कर दी है। मैं इसके आगे कुछ नहीं कहना चाहता। उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों और रक्षा मंत्रालय के कामकाज में कोई संवादहीनता नहीं है। उधर, इस मसले पर प्रधानमंत्री और प्रणब मुखर्जी के बीच बातचीत हुई। इसके बाद मुखर्जी सोनिया गांधी से मिले।

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