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सपनों की सड़क

सड़क की पहचान स्थायी से हो चुके गढ्ढों से हो, यह ख्याल भी डराता है। क्योंकि यहां बात जोखिम और जख्म से कहीं आगे चली जाती है। किसी इंटरव्यू में देरी या शादी-ब्याह में दिक्कत का दर्द भी ऐसी सड़कें देती हैं। कई सपने, कई कॅरियर ऐसे ही गढ्ढों में चले जाते हैं। बाहरी दिल्ली के करीब दर्जनभर इलाकों का एक ऐसा ही दुस्वप्न खत्म होने वाला है। एक नई सड़क से होकर कितने सपनों का रेला गुजरता है यह बात बाहरी दिल्ली में रहने वालों या उधर होकर निकलने वालों से पूछें। उम्मीद है, नरेला से द्वारका को जोड़ने वाले एक्सप्रेस की योजना इस क्षेत्र के लिए विकास की नई रफ्तार लेकर आएगी।

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