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जांच कमेटी को नहीं मिली गड़बड़ी

पीलीभीत बाईपास और मिनी बाईपास पर बने अस्पतालों का ड्रेनेज और सीवर कहां जा रहा है? बीडीए बोर्ड की बैठक में इस मुद्दे पर जोरदार बहस होने के आसार हैं। कमिश्नर के आदेश पर बनी जांच कमेटी ने पांच अस्पतालों को क्लीनचिट दे दी है। सात अप्रैल की बैठक में बोर्ड सदस्य जांच कमेटी को घेरने की कोशिश कर रहे हैं।

हंगामे के बाद शुरू हुई थी जांच
बोर्ड की पिछली बैठक में नगर निगम के पार्षद गुलशन आनंद और मोहम्मद असलम ने आरोप लगाया था कि पीलीभीत बाईपास और मिनी बाईपास पर बने अस्पताल अपना सीवर और ड्रेनेज जमीन में पंप कर रहे हैं। इससे भूगर्भ जल को नुकसान हो रहा है। इस मुद्दे पर बैठक में हंगामा हुआ तो कमिश्नर से बीडीए अफसरों से मामले की जांच कराने और रिपोर्ट को अगली बैठक में रखने के आदेश दिए।

इन अस्पतालों की हुई जांच
बोर्ड की बैठक के बाद बीडीए ने भू-गर्भ जल सर्वेक्षण विभाग को पीलीभीत बाईपास और मिनी बाईपास पर बने अस्पतालों की जांच कराने को पत्र लिखा। विभाग के प्राविधिक सहायक संतोष कुमार ने नगर निगम और क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम के साथ विपिन अस्पताल, भास्कर अस्पताल, लाइफ लाइन अस्पताल, कोपल अस्पताल और पटेल अस्पताल की जांच की। टीम ने पांचों अस्पतालों के ड्रेनेज या सीवर से भूगर्भ जल को कोई नुकसान होने की आशंका से इनकार किया है।

तो फिर कहां जा रहा है गंदा पानी
बीडीए बोर्ड की बैठक का एजेंडा जारी होने के बाद सदस्यों ने इस मुद्दे पर अफसरों को घेरने की तैयारी शुरू कर दी है। बोर्ड के सदस्य गुलशन आनंद का कहना है कि पीलीभीत बाईपास और मिनी बाईपास पर सीवर और ड्रेनेज की व्यवस्था नहीं है। अगर अस्पताल गंदा पानी जमीन में पंप नहीं कर रहे हैं तो फिर उसे कहां बहा रहे हैं। सदस्य राजेश अग्रवाल का कहना है कि बीडीए के अफसरों ने जांच के नाम पर खानापूरी की है। हम इस मामले की दोबारा जांच कराने की मांग करेंगे।

इस बारे में बोर्ड बैठक में ही कोई फैसला लिया जाएगा। एजेंडे में इस बात का उल्लेख नहीं है कि जांच कैसे की गई?
 - के राममोहन राव, कमिश्नर

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