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भारतीय टीम में आने का आसान रास्ता है आईपीएल: रॉबिन

आईपीएल-5 में एक ऐसा बल्लेबाज चमक बिखेरने को बेताब है, जिसने अभी तक ग्लैमर से भरी इस टी20 लीग का एक भी मैच नहीं खेला है। राजस्थान का यह रणजी खिलाड़ी रॉबिन बिष्ट पहले सीजन में चोटिल होने की वजह से आईपीएल का हिस्सा बनने से रह गया था। दूसरे और तीसरे सीजन में किसी टीम ने इसे नहीं रखा और चौथे सीजन में दिल्ली डेयरडेविल्स ने अपने दल में तो शामिल किया, लेकिन एक भी मैच नहीं खिलाया। रॉबिन इस सीजन में रणजी ट्रॉफी में सबसे ज्यादा रन बनाने वाला खिलाड़ी है। राजस्थान को लगातार दूसरे साल चैम्पियन बनाने में रॉबिन के एक हजार से अधिक रनों की अहम भूमिका रही है। सुनील गावस्कर जैसे पारखी 24 वर्षीय रॉबिन को भारतीय टीम में मौका दिए जाने की वकालत कर चुके हैं। पेश है दिल्ली डेयरडेविल्स के लिए आईपीएल में कुछ कर गुजरने की चाह रखने वाले दिल्ली के इस मुंडे से हमारे विशेष संवाददाता राकेश थपलियाल की बातचीत के अंश ..

घरेलू टूर्नामेंटों में चमकने वाले आपके जैस युवा क्रिकेटरों के लिए आईपीएल कितना महत्वपूर्ण है?
मेरे जैसे खिलाड़ियों के लिए आईपीएल इसलिए महत्वपूर्ण है कि सारे चयनकर्ता इसके मैचों को देखते हैं। चयनकर्ता घरेलू मैच भी देखते हैं, पर आईपीएल में टेलीविजन के जरिए पूरी दुनिया में आपके प्रदर्शन को लोग देखते हैं और अच्छा करने पर सराहना मिलती है। भारतीय टीम में आने व प्रसिद्धि पाने का यह आसान रास्ता है।

आईपीएल घरेलू क्रिकेटरों को किस हद तक अंतरराष्ट्रीय अहसास करा पाती है?
इसमें खेलते हुए आप दुनिया भर के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से मिलते हैं, उनके साथ या उनके खिलाफ खेलते हैं तो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खेलने का साअहसास होना स्वभाविक है। हमारे घरेलू क्रिकेट व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में काफी अंतर है, इसलिए आईपीएल में खेलने से यह अंतर कुछ कम होता प्रतीत होता है। इस दौरान बड़े खिलाड़ियों से मिले टिप्स फायदा देते हैं। मैंने पिछले साल सचिन तेंदुलकर से टिप्स लिए और इसका मुझे रणजी में बहुत फायदा मिला था। तकनीक के साथ-साथ मानसिक रूप से काफी मजबूती मिलती है। इसमें हर स्थिति से निपटने की सीख भी मिलती है। यह अहसास होता है कि आप देश के लिए खेलने से एक कदम दूर हैं।

आईपीएल-5 में आप घरेलू क्रिकेट के एक स्टार बल्लेबाज के रूप में उतरेंगे। इससे कुछ दबाव महसूस कर रहे हैं?
दवाब तो नहीं है और मेरी कोशिश यही है कि क्रिकेट को एंजॉय करूं। मुझे लगता है कि रणजी ट्रॉफी में ज्यादा दबाव रहता है। टी20 में आप स्ट्राइक रोटेट करते रहते हैं तो आपका स्ट्राइक रेट भी अच्छा रहता है। अगर मुझे खेलने का मौका मिलता है तो मेरा जोर टीम की जरूरत के हिसाब से रन बनाना और जीत दिलाना ही रहेगा।

आईपीएल में टीमों के साथ नामी विदेशी कोच, ट्रेनर और फिजियो रहते हैं। उभरते खिलाड़ियों के लिए ये कितने मददगार होते हैं?
इनसे फायदा मिलता है। क्रिकेट में मैदान के बाहर भी बहुत चीजें होती हैं, जो आपके खेल को प्रभावित करती हैं। पिछले दिनों मेरे पैर में दर्द था और मैं डर रहा था कि ये बड़ी चोट न हो। पर दिल्ली डेयरडेविल्स के ट्रेनर ने मुझे बताया कि ये महज स्टिफनेस है, जो सही ढंग से न चलने की वजह से आ जाती है। हमारे कोच एरिक सिमंस भारतीय टीम के गेंदबाजी कोच रहे हैं और वो यही कहते हैं कि आईपीएल में खेलने का मतलब छक्के सिर्फ मारना नहीं है। आप बस स्ट्राइक रोटेट करते रहोगे, तब भी काम चल जाएगा। बस जिम्मेदारी को समझो और जैसी जरूरत है, उसके हिसाब से खेलो।

देशी-विदेशी स्टार खिलाड़ियों के साथ या उनके खिलाफ खेलने का कितना दबाव रहेगा?
मैं अनेक स्टार खिलाड़ियों के साथ खेल चुका हूं। ये स्टार भी कभी हमारी तरह ही थे। वे हमारे मेंटोर भी हैं। हमारे लिए उनसे क्रिकेट ही नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी के अनुभवों से भी काफी कुछ सीखने को रहता है।

दिल्ली डेयरडेविल्स की टीम पिछले सीजन अंतिम स्थान पर रही थी। इस बार के लिए कप्तान सहवाग ने क्या मंत्र दिया है?
सहवाग ने इतना ही कहा है कि हमारी टीम में सभी अंतरराष्ट्रीय व प्रथम
श्रेणी का क्रिकेट खेले हुए खिलाड़ी हैं। सभी को 110 प्रतिशत योगदान देने की कोशिश करनी चाहिए। जीतना भी जरूरी है, क्योंकि इससे मनोबल और आत्मविश्वास बढ़ता है व दबाव नहीं रहता। टीम की स्थिति भी सुधरती है।

 

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