DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

छोटी बातों का बड़ापन

इंटरव्यू खराब होने से उनका मूड ऑफ था। टीवी पर चैनल बदलते हुए भी उदासी हावी हो रही थी। आखिर वह छत पर पहुंचे और पड़ोसी बच्चे की पतंग बनाने में मदद करने लगे। कुछ ही देर में उनके मूड की रीफिलिंग हो चुकी थी। दरअसल, छोटी-छोटी बातें जीवन में काफी मायने रखती हैं। यह अकेलापन-उदासी आदि दूर करने में अचूक है। बिहैवियर काउंसिलर विल लॉरेंस का मानना है कि वैसी संस्कृतियों में अधिक जिंदादिली पाई जाती है, जहां छोटी-छोटी चीजों को लेकर एक-दूसरे की मदद करने की प्रवृत्ति होती है। यह खुशियों को बांटने जैसा है, जो आपको जीवंत बनाता है। हम छोटी बातों को कम ही तवज्जो देते हैं और यह भूल जाते हैं कि इन्हें नजरअंदाज कर सफल जीवन नहीं जिया जा सकता। चार्ल्स डिकेन्स की ऑल द ईयर राउंड का एक पात्र प्रश्न करता है कि बुद्धिमान किसे कहा जाए? जवाब मिलता है- उसे जो सामान्य से सामान्य बात पर भी ध्यान दे और उससे जुड़ाव महसूस करे। लेकिन सवाल है कि इस तरह आज बुद्धिमान होना कौन चाहता है। अधिकांश लोगों की नजर बड़ी-बड़ी चीजों पर होती है और वे समझ नहीं पाते कि सफल जीवन का सूत्र उनसे कैसे छूट रहा है। क्रिकेट कोच रमाकांत अचरेकर ने एक साक्षात्कार में बताया था कि सचिन तेंदुलकर और उनके अन्य शिष्यों में मूलभूत अंतर यही रहा कि तेंदुलकर छोटी-सी सीख को भी पूरी तवज्जो देते थे। उनमें छोटी-छोटी चीजों पर अपने साथियों की मदद करने की भावना बलवती थी। हाल ही में ब्रिटेन में दांपत्य जीवन में खुशी को लेकर एक शोध किया गया। पाया गया कि तलाक या वैवाहिक जीवन में खटपट की सबसे बड़ी वजह है पति-पत्नी द्वारा एक-दूसरे की छोटी-छोटी जरूरतों की उपेक्षा करना। सही मायने में हमारी जरूरतें छोटी हैं। बस हम इन्हें उस मैग्नीफाइंग ग्लास से देखने के आदि हैं, जो चीजों को कई गुना बड़ा करके दिखाती है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:छोटी बातों का बड़ापन