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जनरल की मंशा

थल सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह इन दिनों सुर्खियों में हैं। ऐसा इसलिए नहीं कि उनकी ईमानदारी की चर्चा सभी जगह हो रही है। दरअसल, वह विवादों में घिरते जा रहे हैं। ताजा विवाद रिश्वत प्रकरण से जुड़ा है। जनरल ने मीडिया को बताया कि उन्हें रिश्वत देने की पेशकश की गई थी। इस खुलासे से फौज की बदनामी तो हुई ही, इस प्रतिष्ठित पद की गरिमा को भी चोट पहुंची है। इस विवाद को जल्द से जल्द निपटाया जाए, यही देशहित में है। एक बात और। लगता है कि जनरल सिंह रिटायर होने से पहले अपना नाम इतिहास में अमर कराना चाहते हैं। उनके मुताबिक, उन्हें साल 2010 में रिश्वत की पेशकश की गई थी। उन्होंने इसकी जानकारी रक्षा मंत्री को दी थी। पर थल सेनाध्यक्ष खुद इस मामले को आगे बढ़ाना नहीं चाहते थे, इसलिए मामला खत्म हो गया। फिर वह रिटायर होने से दो महीने पहले इस मामले को क्यों तूल दे रहे हैं? आखिरी वक्त में सेना की कमियों को गिनाने से क्या फायदा?
ब्रजमोहन, बी-2/94, पश्चिम विहार, नई दिल्ली

देर आए, दुरुस्त आए
मुंबई हमले का मास्टरमाइंड हाफिज मोहम्मद सईद घिर चुका है। अमेरिका ने लश्कर-ए-तैयबा के इस संस्थापक पर एक करोड़ डॉलर का इनाम रखा है। अमेरिका के इस कदम से पाकिस्तान को धक्का लगा है, पर हमारे लिए यह खुशी की बात है। हम  विश्व बिरादरी को लगातार बताते रहे हैं कि हाफिज मोहम्मद सईद एक आतंकवादी है और इसी के इशारे पर 26/11 को मुंबई हमले को अंजाम दिया गया। लेकिन पाकिस्तान हाफिज सईद को धर्मगुरु बताता रहा। लाहौर और पेशावर में उसके भाषण आए दिन होते रहते हैं। उन भाषणों को गौर से सुना जाए, तो उनमें मजहब की कोई बात नहीं होती, बस भारत के खिलाफ आग उगला जाती है। बहरहाल, अमेरिका के इस कदम के लिए भारतीय विदेश मंत्रालय की जितनी प्रशंसा की जाए, कम है। दरअसल, विदेश मंत्री एस एम कृष्णा लगातार अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर दबाव बना रहे थे कि सीमा पार आतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। लगता है कि अमेरिका ने इसकी शुरुआत कर दी है। अब तो हम यही कह सकते हैं कि देर आए, पर दुरुस्त आए।
रोशन मल्होत्रा, कीर्ति नगर, दिल्ली

तरक्की की ओर गोवा
गोवा के स्थानीय लोगों को काफी राहत मिली है। दरअसल, राज्य सरकार ने पेट्रोल पर से टैक्स को कम किया है। वैसे भी, इस राज्य का पर्यटन उद्योग तेजी से फल-फूल रहा है। पेट्रोल के दाम घटने से पर्यटन का कारोबार और बढ़ेगा ही। उम्मीद है कि आने वाले समय में गोवा में और तरक्की होगी, बशर्ते खनन माफियाओं को पकड़ा जाए।
एस पटेल, आर के पुरम, नई दिल्ली

अर्थ आवर से आगे
पर्यावरण की चिंता अब सबको है। इसलिए बीते 31 मार्च को अर्थ आवर के दौरान कई लोगों ने अपने घरों की बत्तियां बंद रखीं। इससे न केवल ऊर्जा की काफी बचत हुई, बल्कि उतनी देर तक वातावरण भी साफ-सुथरा बना रहा। गौरतलब है कि बीते पांच साल से हम ‘अर्थ आवर’ मना रहे हैं। लेकिन अब हमें इससे आगे सोचना होगा। अभिप्राय यह कि हमें और ऊर्जा बचत की योजना बनानी होगी और पर्यावरण को बचाने के लिए अधिक सार्थक कदम उठाने होंगे। मसलन, हम रोजमर्रा के कामकाज के दौरान भी पर्यावरण का ध्यान रख सकते हैं। रसोई में पानी की कम बर्बादी हो, रात में सोते वक्त सभी कमरों की बत्तियां बंद रहे और कम ऊर्जा खपत करने वाले यंत्रों का अधिक से अधिक इस्तेमाल हो, तो इसे बड़ी आसानी से सुनिश्चित किया जा सकता है।
तृप्ति, अशोक विहार, दिल्ली

 

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