DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

दस साल से चल रहा था अवैध कारोबार

संरक्षित जीव-जन्तुओं के तस्करी के जिस ठिकाने पर छापा मारा गया वहाँ पिछले दस साल से यह गोरखधंधा चल रहा है। बदबू और आंखों में जलन करने वाले केमिकल से क्षेत्रीय जनता परेशान थी। आए दिन गोदाम मालिक से शिकायत की जाती थी। कोई सुनवाई नहीं होती थी। गोदाम के गेट पर चौकीदार रहता था जो किसी भी अनजान व्यक्ति को अंदर नहीं जाने देता था।


जिस घर में अवैध कारोबार चला रहा था उसे किले की तरह बनाया गया था। सामने बड़ा गेट लगा था। मकान के अंदर का कोई हिस्सा दिखाई नहीं देता था। बराबर स्थित एक मकान गोदाम मालिक का ही है जो वर्षो से खाली पड़ा है। वहाँ भी ऊंची दीवार उठाई गई थी। गोदाम के गेट खुलने के बाद एक लंबी गैलरी है। अंदर बड़े-बड़े कमरे बने हुए हैं। एक में ऑफिस बना हुआ है। अन्य में जीव-जन्तुओं के ड्रम भरे हुए थे। यहां काम करने वाले लोग इसी परिसर में रहते थे। उन्हें पहली और दूसरी मंजिल पर कमरे दिए गए थे, ताकि कोई बाहर रहने नहीं आए। गोदाम का गेटकम से कम खुले।


गिरफ्तार रमेश महाजन ने बताया कि वह पिछले दस साल से यह काम कर रहे हैं। उनका काम गैर कानूनी नहीं है। उनकी फर्म रजिस्टर्ड है। संयोग से कुछ संरक्षित जीव भी उनके यहाँ मिले हैं। बाहर से जो पार्सल आते हैं उनके खुलने के बाद ही साफ होता है कि कौन से जीव रखे हुए हैं। वहीं दूसरी तरफ क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि आबादी क्षेत्र में इस तरफ का काम प्रतिबंधित होता है। नियमों को ताक पर रखकर घनी आबादी क्षेत्र में जीव जन्तुओं की तस्करी का गोरखधंधा चल रहा था। मरे हुए जीव-जन्तुओं की दरुगध ने उनका जीना दुश्वार कर दिया था।


दारोगा को आया चक्कर, आंखों में जलन


 जीव-जन्तु के गोदाम में चेकिंग तो दूर की बात चंद मिनट खड़ा होना भी दुश्वार हो रहा था। जिन ड्रमों में उन्हें भरकर रखा गया था उनमें केमिकल भी पड़ा था। ड्रमों के ढक्कन खुलते ही दरुगध ने छापा मारने गई पुलिस टीम के होश उड़ा दिए। कुछ देर बाद सभी की आंखों में जलन होने लगी। एक दारोगा को तो चक्कर आ गया। कई गिलास पानी पीने के बाद दारोगा जी होश में आए। आखिर तक नाक से रुमाल नहीं हटाया। अन्य पुलिस कर्मी भी मुंह पर रुमाल बांधकर रहे। ऐसे माहौल में कर्मचारी कैसे काम करते हैं यह पूछने पर मालिक ने जवाब दिया कि उन्हें आदत हो गई है। उन्हें दिक्कत नहीं होती।


मुंबई और मद्रास से आते हैं जीव जन्तु

 गोदाम पर जीव जन्तुओं का जखीरा देखकर पुलिस कर्मी भी हैरान थे। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि लाखों की संख्या में जीव जन्तु मिलेंगे। पूछताछ में बायोक्राफ्ट साइंटिफिक सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के मालिक रमेश महाजन ने बताया कि सभी जीव जन्तु मुंबई और मद्रास से आते हैं। यहां उन्हें कैमिकल में सुरक्षित रखा जाता है। बाद में काँच के जारों में रखकर स्कूल-कॉलेजों में भेजा जाता है। उनकी कंपनी की बेवसाइट भी है।

कोरियर कंपनी में मिले थे कोबरा


 संरक्षित वन जीवों की तस्करी के मामले का शहर में पहली बार खुलासा नहीं हुआ है। अक्टूबर 2006 में संजय प्लेस की एक कूरियर कंपनी में बड़ी संख्या में संरक्षित जीव मिले थे। कूरियर का डिब्बा खुलने पर खुलासा हुआ था। उसके बाद पुलिस ने कैलाशपुरी मार्ग स्थित बृजेश उपाध्याय के घर छापा मारा था। वहाँ भी इसी अंदाज में ड्रमों में जीव-जन्तु भरे मिले थे। उस दौरान वन विभाग के अधिकारियों ने यह दावा किया था कि अभी तक की सबसे बड़ी कार्रवाई हुई है। इतनी बड़ी संख्या में कभी संरक्षित जीवों का जखीरा नहीं मिला। बृजेश उपाध्याय फरार हो गया था। उसकी पत्नी को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया था। बृजेश पर बीस हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। उसने लगभग एक साल की फरारी काटी थी। एसटीएफ आगरा यूनिट में तैनात सब इंस्पेक्टर श्याम सुंदर ने उसे गिरफ्तार किया था। उसने भी यही बयान दिया था कि वह स्कूल कॉलेजों में जीव जन्तुओं की सप्लाई करता था।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:दस साल से चल रहा था अवैध कारोबार