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कैग रिपोर्ट का खुलासा, इंदिरा आवास योजना में भारी अनियमितता

भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट के अनुसार बिहार में इंदिरा आवास योजना में वित्तीय अनियमितता, अनुश्रवण की कमी, राशि के विचलन और प्रगति का भौतिक सत्यापन नहीं होने के कारण वास्तविक हकदारों को योजना का लाभ नहीं मिल रहा है।

भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक का 31 मार्च 2011 को समाप्त हुए वर्ष का प्रतिवेदन कल विधानसभा में पेश किया गया जिसमें वर्ष 2006 से 2010-11 की अवधि में इंदिरा आवास योजना के क्रियान्वयन से संबंधित लेखा परीक्षा में वार्षिक योजना का नहीं बनाया जाना, मासिक लक्ष्यों का निर्धारण नहीं किया जाना, निधियों का कम विमुक्त किया जाना, निधि का विचलन किया जाना और दैनीय अनुश्रवण आदि कमियां उजागर हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार आवासविहीन परिवारों की स्थाई इंदिरा आवास योजना प्रतीक्षा सूची कभी नहीं बनाई गई जिसके कारण पक्का आवास वाले अयोग्य लाभान्वितों को 10.36 लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराई गई और प्रतीक्षा सूची में वरीयता को नजरअंदाज किया गया।

इसी तबनौर पंचायत स्तर पर लक्ष्यों के निर्धारण में जिला ग्रामीण विकास अभिकरण द्वारा लक्षित जन समुदाय को योजना लाभ की प्रदातता सुनिश्चित करने वाले मापदंडों की अवहेलना की गई। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2006 से 2011 के दौरान योजना मार्गदर्शिका में निर्धारित मानको से अधिक निधियों के आगे बढ़ाए जाने के कारण केन्द्र सरकार द्वारा 794.14 करोड़ रुपये का केंद्रांश विमुक्त नहीं किया गया।

इसी तरह योजना मार्गदर्शिका की अवहेलना करते हुए 325.35 करोड़ रुपये की राशि अलग बैंक खाता में नहीं जमा कर प्रखंड कार्यालयों के सामान्य बैंक खातों में जमा किया गया।

कैग रिपोर्ट के अनुसार गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर करने वाले भूमिहीन परिवारों के लिए भूमि अधिग्रहण के उद्देश्य से केन्द्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई 53.34 करोड़ रुपये की राशि का विभाग उपयोग करने में विफल रहा। इसी तरह ग्रामीण विकास अभिकरणों द्वारा नक्सल पैकेज के तहत इंदिरा आवास के निर्माण में संबंधित वार्षिक लक्ष्यों की स्वीकृति में विलंब के कारण राज्य के खजाने पर 14.34 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा।

कैग रिपोर्ट के अनुसार पथ निर्माण एवं ग्रामीण कार्य विभाग में अलकतरे के कम उठाव और उपयोग नहीं होने के कारण सरकार को 77.48 लाख रुपये की हानि हुई है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य के सात विश्वविद्यालयों के उप कुलपतियों द्वारा छात्रों से एकत्र किए गए 17.23 करोड़ के शुल्कों को अपने कर्मचारियों के वेतन पर अनियमित रूप से उपयोग किया गया जिसने संबंधित महाविद्यालयों के अंत: संरचनात्मक विकास एवं सुविधाओं को प्रभावित किया।

रिपोर्ट में डीसी बिल को लेकर सरकारी विभाग की खिंचाई की गई है और कहा गया है कि व्यय प्रबंधन में और अधिक सुधार की जरुरत है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 14 सितम्बर 2011 तक 74117 एसी बिल पर निकासी किए गए 22 हजार 575 करोड़ रुपये के डीसी बिल जमा नहीं हुए है। वर्ष 2002-03 से 2010-11 तक 83542 एसी बिल पर 25 हजार 331.05 करोड़ की निकासी में सिर्फ 2755.68 करोड़ रुपये के 9425 डीसी बिल ही जमा हुए हैं।

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  • Web Title:इंदिरा आवास योजना में भारी अनियमितता