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हर उम्र में सेहत अनलिमिटेड

स्वस्थ जीवन कुदरत की नियामत है। लेकिन बेतरतीब जीवनशैली अपनाकर हम बीमारियां मोल ले बैठे हैं। अगर अभी भी हम कुछ सावधानियां बरत सकें तो स्वस्थ और खुशहाल जीवन जी सकते हैं। शमीम खान का आलेख

हमारे विशेषज्ञ

विनीता गोगिया
मेडिटेशन एंड वेलनेस कंसल्टेंट

डॉ. संजीव गुप्ता
सीनियर फिजिशियन, नोवा मेडिकल सेंटर

शीला सहरावत
डाइटिशियन, डाइट क्लीनिक

अगर आप स्वस्थ हैं तो सफलता और खुशियां भी साथ-साथ चली आती हैं। स्वस्थ रहना इतना मुश्किल भी नहीं है, लेकिन अपनी गलत खानपान की आदतों, अनावश्यक तनावों और आलस के कारण हम इसे सबसे कठिन काम बना देते हैं। अगर आप स्वस्थ होंगे तो न सिर्फ बीमारियां आपसे दूर रहेंगी, बल्कि आप आकर्षक और युवा भी नजर आएंगे। तो क्यों न आज बीमारियों की बात करने के बजाए स्वस्थ रहने के कुछ गुर सीखे जाएं।

टीनएज में रहें टिप टॉप
टीनएज बचपन और युवावस्था के बीच की अवस्था होती है। इसे शारीरिक और भावनात्मक दोनों ही रूप से उम्र का सबसे नाजुक दौर माना जाता है। लड़के और लड़कियों दोनों में हार्मोनल बदलाव शुरू हो जाते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य समस्याएं भी शुरू हो जाती हैं। वैसे तो हर उम्र में अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखना चाहिए, लेकिन अच्छी आदतें जितनी जल्दी विकसित हों, उतना ही अच्छा है। इस उम्र में उसे विकसित करना आसान हो सकता है।

नियमित एक्सरसाइज और योग करने की आदत डाल लें। पद्मासन, सुक्तावीर आसन, वज्रासन करें। शवासन भी करें, इससे शांति मिलती है।

उन्हें प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ जैसे अंडा, दूध, अंकुरित अनाज, सूखे मेवे दें, ताकि उनका शारीरिक विकास ठीक से हो। 

अपने लाडले को 10-12 गिलास पानी पीने के लिए कहें, ताकि भोजन ठीक से पच सके और विषाक्त पदार्थ शरीर से बाहर निकल सकें।

युवावस्था में भी न करें सेहत की अनदेखी
जीवन की सबसे प्रोडक्टिव उम्र होती है यह अवस्था। करियर, पारिवारिक और सामाजिक जीवन के बीच तालमेल बैठाना पड़ता है। इस उम्र में शरीर का मेटाबोलिज्म बहुत अच्छी अवस्था में होता है। इसलिए आप अपने खानपान के प्रति कभी-कभी लापरवाह भी हो जाते हैं, जो ठीक नहीं।

ज्यादा देर तक कंप्यूटर पर टकटकी लगाकर न देखें, थोड़ी-थोड़ी देर में पलकों को झपकाते रहें। कुर्सी पर बैठें तो पावों को जमीन पर टिका दें।

व्यायाम और योग करें। सूर्य नमस्कार, प्रणायाम करें। यह न सिर्फ शारीरिक, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है। इससे एकाग्रता भी बढ़ती है।

कई युवतियों में हार्मोन असंतुलन और एनिमिया की समस्या भी हो जाती है। इनसे बचने के लिए संतुलित भोजन खाएं। भरपूर नींद लें और तनाव से दूर रहें।

कई युवा धूम्रपान और शराब के अभ्यस्त हो जाते हैं। इन चीजों से बचें।

मेडिटेशन करें। यह तेज रफ्तार जिंदगी में आपको मानसिक शांति देगा।

ताकि ढलती उम्र में भी बरकार रहे कोशिश
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, आपके शरीर और भोजन के बीच रिश्ता बदलता जाता है। आपका रीप्रोडक्टिव सिस्टम कमजोर और मेटाबोलिज्म धीमा होने लगता है। इस उम्र में सबसे जरूरी है यह समझना कि आप अपने शरीर की बदलती जरूरतों के साथ कैसे तालमेल बैठाते हैं।

ज्यादा से ज्यादा फल, सब्जियां और साबुत अनाज खाएं, क्योंकि इनमें फाइबर होता है जिससे पाचन तंत्र पर भार नहीं पड़ता है।

शारीरिक बदलावों के कारण डीहाइड्रेशन अधिक होता है। इसलिए शरीर में पानी की मात्र बनाए रखने के लिए पर्याप्त पानी और तरल पदार्थों का सेवन करें।

जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, हमारे मस्तिष्क की कोशिकाएं तेजी से नष्ट होने लगती हैं। मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए संतुलित भोजन के अलावा खाली वक्त में वर्ग पहेली हल करें या शतरंज खेलें।

बुढ़ापा में भी लें जीवन का आनंद
उम्र बढ़ने के साथ अपनों को खोने का दुख, रिटायरमेंट और स्वास्थ्य समस्याएं व्यक्ति को अवसादग्रस्त और चिड़चिड़ा बना देती हैं। लेकिन थोड़ी-सी कोशिश से इन परिस्थितियों से उबरा जा सकता है और जीवन का आनंद लिया जा सकता है।

शारीरिक सक्रियता बनाए रखें।
सादा और सुपाच्य भोजन खाएं।
सूर्य नमस्कार, कपालभाति, प्राणायाम, नाड़ी शोधन जैसे आसन और कुछ आसान मुद्राएं करें।
साल में एक बार अपना हेल्थ चैकअप जरूर करवाएं।

बच्चों को स्वस्थ रखने के गुर
अपने बच्चों के स्वास्थ्य का उस समय विशेष ख्याल रखें, जब उनकी समझ विकसित न हुई हो। आज के बच्चे छोटी उम्र में ही पूरे दिन टीवी और इंटरनेट से चिपके रहते हैं। जीवनशैली बदलने से खानपान की आदतें भी बदल गई हैं। जंक फूड बच्चों का पसंदीदा खाना हो गया है। इन सब चीजों से उनकी सेहत पर बड़ा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

बच्चों को फास्ट फूड और फैट फूड की बजाए घर का बना खाना खिलाएं।
अंकुरित अनाज खिलाएं क्योंकि शरीर इनको आसानी से ग्रहण कर लेता है।
उनके भोजन में फलों और सब्जियों को शामिल करें। भोजन में एक तिहाई फल और सब्जियां तथा दो तिहाई अनाज होना चाहिए।
उन्हें ताड़ासन, पद्मासन और भुजंग आसन जैसे सामान्य योगासन करने की आदत डालें।
सॉफ्ट ड्रिंक के बजाए ताजा फलों का जूस दें।
बच्चों को ज्यादा टीवी न देखने दें। खुली जगह में खेलने दें।

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