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कोषागारों के बंद रहने की हो सीबीआई जांचः सिद्दिकी

बिहार विधान सभा विपक्ष के नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने वित्तीय वर्ष 2011-12 के अंतिम दिन दोपहर बाद सभी कोषागारों के बंद रहने की केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने और भारतीय रिजर्व बैंक से अभिप्रमाणित श्वेत पत्र जारी करने की सरकार से मांग की है।

सिद्दीकी ने मंगलवार को यहां कहा कि वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन दोपहर बाद राज्य के कोषागारों से निकासी पर सरकार द्वारा रोक लगाने के आदेश से प्रदेश में वित्तीय आपातकाल की स्थिति उत्पन्न हो गई है। उन्होंने कहा कि 31 मार्च को राज्य का खजाना न सिर्फ खाली हो गया बल्कि सरकार अरबो रुपए के ओवर ड्राफ्ट में चली गई और इसलिए आननफानन में प्रधान सचिव स्तर के अधिकारियों को कोषागार में राशि जमा कराने का संदेश दिया गया।

विपक्ष के नेता ने कहा कि जहां-जहां सरकार की राशि जमा की गई थी उसे पुनः निकालकर कोषागार में जमा कराया गया और इसपर सरकार कह रही है कि कोषागार से निकासी पर रोक लगाकर मार्च लूट को रोक दिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार वित्तीय प्रबंधन के मोर्चे पर पूरी तरह से विफल साबित हुई है और चारो तरफ लूट मची हुई है।

सिद्दीकी ने कहा कि सरकार वित्तीय प्रबंधन को दरकिनार कर केवल अपनी छवि चमकाने और वाहवाही लूटने में लगी है। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2011-12 के बजट में 24 हजार करोड़ का योजना मद का अनुमान व्यय रखा गया जिसे प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय अनूपूरक के बाद लगभग 29 हजार पांच सौ करोड़ कर दिया गया और इसे सरकार की उपलब्धी के रूप में पेश किया गया।

उन्होंने कहा कि वित्तीय प्रबंधन में विफल राज्य सरकार ने योजना आकार घटाकार 21 हजार 390 करोड़ कर दिया जो बिहार की गरीब जनता के साथ छलावा है। विपक्ष के नेता ने कहा कि पिछले कुछ दशको से आजतक ऐसी वित्तीय अराजकता की स्थिति नही उत्पन्न हुई थी। उन्होंने वित्तीय वर्ष 2011-12 में हुई कथित मार्च लूट की सीबीआई से जांच कराने की मांग की और कहा कि सरकार वित्तीय स्थिति के संबध में रिजर्व बैंक से अभिप्रमाणित श्वेत पत्र जारी करे, क्योंकि सरकार आंकड़ों की बाजीगरी में माहिर है।

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