DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

नींद की दवाओं के दुरुपयोग पर रोक लगना जरूरी

वाराणसी कार्यालय संवाददाता

अक्सर लोग नींद की दवा का सेवन नशे के रूप में करने लगते हैं। इस पर रोक लगना जरूरी है। यह सेहत के लिए नुकसानदेह है। व्यक्ति को स्वस्थ रहने के लिए प्रतिदिन सात से आठ घंटे की नींद लेना जरूरी है।

ये बातें बीएचयू के मनोरोग विभाग की अध्यक्ष प्रो. इंदिरा शर्मा ने मंगलवार को पराड़कर स्मृति भवन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही।प्रो. शर्मा ने बताया कि कई लोगों में अनिद्रा की बीमारी हो जाती है। इसके कई कारण हो सकते हैं, लेकिन यह मौत का सफर होती है। बीएचयू में आने वाले मनोरोगियों में 90 प्रतिशत अनिद्रा के शिकार होते हैं। इसके अलावा कैंसर, भीषण दर्द से भी नींद नहीं आती है। इसके लिए चिकित्सक मरीजों को नींद की दवा देते हैं। मर्ज के ठीक होने के साथ ही यह दवा बंद कर दी जाती है, लेकिन कुछ लोग इसका सेवन फिर भी जारी रखते हैं। यह गलत है। इस प्रवृत्ति को रोकना होगा। नींद की दवा का ज्यादा उपयोग करने से याद्दाश्त सम्बन्धी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ समय बाद ऐसी स्थित हो जाती है कि अगर वह दवा का सेवन छोड़ना भी चाहे तो संभव नहीं हो पाता।

उन्होंने बताया कि मस्तिष्क में हाइपोथैलामस नाम का तत्व होता है, जो निद्रा के समय शरीर की क्षतिग्रस्त हुई कोशिकाओं की मरम्मत करता है। इससे दूसरे दिन सुबह उठने पर व्यक्ति तरोताजा होता है। अगर नींद नहीं आएगी तो यह तत्व काम नहीं करेगा और शरीर लगातार थकान महसूस करता रहेगा। धीरे-धीरे यह बीमारी से ग्रस्त हो जायेगा।विभिन्न आयुवर्ग में निद्रानवजात शिशु 18-20 घंटेछोटे बच्चों करीब 10 घंटेवयस्क आठ घंटेबुजुर्ग पांच-छह घंटे

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:नींद की दवाओं के दुरुपयोग पर रोक लगना जरूरी