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अक्षय ऊर्जा से ही रोशन होगा ग्रामीण बिहार

किसी भी देश या राज्य के तेज आर्थिक विकास की पहली जरूरत होती है ऊर्जा। अपनी ऊर्जा जरूरतों को थर्मल पावर उत्पादन के सहारे पूरा करने की बिहार सरकार की कोशिशों को हाल ही में उस समय करारा झटका लगा, जब 24 जनवरी को केंद्र सरकार ने बिहार को कोल लिंकेज देने से इनकार कर दिया। इस इनकार से बरौनी व कांटी थर्मल पावर प्लांट की क्षमता बढ़ाने की राज्य सरकार की उम्मीदों पर पानी फिर गया। एक सशक्त बिहार के निर्माण के लिए ऊर्जा की कमी को यथाशीघ्र दूर करना सबसे बड़ी चुनौती है। दरअसल, वर्ष 2000 में राज्य के विभाजन के बाद ज्यादातर पावर प्लांट झारखंड में चले गए। मौजूदा बिहार को अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करने के लिए 90 फीसदी बिजली बाहर से खरीदनी पड़ती है। राज्य में प्रति व्यक्ति बिजली की खपत करीब 100 यूनिट है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 717 यूनिट है। फिर व्यस्ततम समय में बिजली की मांग व आपूर्ति के बीच का अंतर राज्य में लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में, राज्य सरकार के पास सबसे अच्छा उपाय यही है कि वह स्थानीय स्तर पर बिखरे पड़े अक्षय ऊर्जा संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करे।

हाल ही में ग्रीनपीस द्वारा जारी की गई रिपोर्ट- ‘एम्पावरिंग बिहार : पॉलिसी पाथवे फॉर एनर्जी एक्सेस’ उन विकल्पों पर विस्तार से प्रकाश डालती है, जिनको बिहार के ग्रामीण इलाकों की ऊर्जा जरूरतें पूरी करने के लिए संस्थागत व सरकारी स्तर पर अपनाने की जरूरत है। इन इलाकों में अक्षय ऊर्जा संसाधनों का अपार भंडार है, बस उनका उचित इस्तेमाल करने की जरूरत है। जैसे बिहार में ‘हस्क पावर सिस्टम’ धान की भूसी का इस्तेमाल करके करीब एक लाख लोगों को बिजली उपलब्ध करा रही है। बिहार मुख्यत: कृषि प्रधान राज्य है, इसलिए यहां कृषि अपशिष्टों की कमी नहीं हो सकती, जो ऊर्जा उत्पादन के अच्छे संसाधन होते हैं। प्रदेश के उत्तरी हिस्से में छोटे-छोटे हाइड्रो पावर प्लांट व पवन चक्कियां भी स्थापित की जा सकती हैं।

दरअसल, विकेंद्रित ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने हेतु राज्य सरकार को नीति बनाते हुए माइक्रो ग्रिड के लिए मददगार संस्थागत अवसर पैदा करने चाहिए। राज्य सरकार को उन अवसरों पर भी विचार करना चाहिए, जो वह पूर्व में गंवा चुकी है। सोलर प्रोजेक्ट विकसित करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से चालू किए गए नेशनल सोलर मिशन जैसे शानदार अवसर का राज्य ने उपयोग नहीं किया। कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा को अपनाने के लिए सोलर पावर पंपसेट, सोलर पावर सिंचाई आदि के इस्तेमाल की योजनाएं अपनानी चाहिए। राज्य में वर्षा भी अच्छी होती है, इसे देखते हुए छोटे-छोटे हाइड्रो सिस्टम स्थापित करके बड़ी मात्र में जलीय ऊर्जा पैदा की जा सकती है। इन ऊर्जा स्त्रोतों के जरिये बिहार विकास की ठोस नींव तो रखेगा ही, वह एक मॉडल भी बन सकता है।
(ये लेखिका के अपने विचार हैं) 

 

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