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महंगाई मार गई

पाकिस्तान में पेट्रोलियम पदार्थों और सीएनजी की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़त दर्ज की गई है। इससे अवाम में गुस्सा है। लोग-बाग हैरान हैं, क्योंकि एक ओर वे भ्रष्टाचार से हलकान हैं, तो दूसरी ओर उनकी जिंदगी दहशत के साये में है, और ऊपर से अब महंगाई ने कमर तोड़ दी है। इसलिए पूरे मुल्क में जो गुस्सा है, उसे हुकूमत चेतावनी के तौर पर ले और बढ़ी हुई कीमतों को वापस लेने का फैसला करे। वैसे हम पहले भी देख चुके हैं कि पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़ने का असर सभी क्षेत्रों में पड़ता है। सामान व सेवाओं के दाम एकाएक बढ़ जाते हैं। टांसपोर्टर बिरादरी बढ़े हुए दामों को वापस लेने की मांग पर अड़ी है। हालांकि हुकूमत ने इंटरसिटी किराये में पांच से दस फीसदी के इजाफे का फैसला किया है। पर ट्रेडर बिरादरी सिविल नाफरमानी की हद तक जा सकती है, क्योंकि इसने हुकूमत को पेट्रोलियम पदार्थो व सीएनजी की बढ़ी हुई कीमतों को वापस लेने के लिए 72 घंटे की मोहलत दी है। इससे पता चलता है कि कारोबारियों के गुस्से का गुब्बारा कितना बड़ा हो चुका है। दरअसल, कारोबारी अपनी आमदनी को घटते हुए देख रहे हैं, क्योंकि आम लोग खरीदारी नहीं कर रहे हैं। मुल्क में  सस्ते हिन्दुस्तानी सामान की बाढ़-सी आ गई है और स्थानीय कारोबार सिमटता जा रहा है। ऐसे में, विपक्षी पार्टियों का रवैया क्या होगा, इसे समझा जा सकता है। पीएमएल (नवाज) ने बीते सोमवार को नेशनल सिक्युरिटी पर पार्लियामेंटरी कमेटी की बैठक में हिस्सा ही नहीं लिया। आज इसके कार्यकर्ता प्रोटेस्ट रैली निकाल रहे हैं। पीपीपी गठबंधन में सहयोगी दल एमक्यूएम ने भी बढ़ाए गए दाम को वापस लेने की मांग की है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ और जमात-ए-इस्लामी, दोनों ने हुकूमत के फैसले को अवाम विरोधी बताया है। यह तो साफ है कि साल-दर-साल हर महंगाई बढ़ती जा रही है। लोगों का गुजर-बसर भी ठीक से नहीं चल रहा है। ज्यादातर लोअर मिडिल क्लास और मिडिल क्लास गरीबी रेखा के आस-पास पहुंच गए हैं। उन परिवारों की तो बात ही छोड़िए, जो किसी तरह बदन ढक ले रहे हैं और दो जून की रोटी जुटा रहे हैं।
द नेशन, पाकिस्तान

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