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दागी को वकील बनाने पर भड़के छात्र, हंगामा

अंबेडकर विवि में दागी और विवादास्पद व्यक्ति को अधिवक्ता बनाए जाने पर छात्रनेता बुरी तरह भड़क गए हैं। छात्रों ने रजिस्ट्रार, वित्ताधिकारी और पूर्व कुलपति को घेर लिया। वित्ताधिकारी की मेज का शीशा तोड़ दिया। उन पर सवाले दागे। अफसरों पर छात्रों के सवालों के जवाब नहीं थे। आखिर में रजिस्ट्रार ने जांच की बात कहकर जान छुड़ाई। छात्रों ने ऐलान किया है कि दागी वकील को विवि में काम नहीं करने देंगे।

बीते दिनों विवि ने विवादास्पद व्यक्ति को विवि का अधिवक्ता बना दिया है। उसके खिलाफ तमाम गणमान्य लोगों ने राजभवन तक शिकायतें की हैं। दागी ने खुद को फर्जी रूप से विवि में विधि का प्रवक्ता घोषित कर रखा था। कई लैटरपैड पर उसने यह छपवा रखा था। दो संस्थाओं के माध्यम से उस पर अधिकारियों पर दबाव बनाने के आरोप हैं। खुद सांसद राज बब्बर उसकी शिकायत राज्यपाल से कर चुके हैं। ऐसे व्यक्ति को कुलपति प्रो. डीएन जाैहर ने आनन-फानन में विवि का वकील नियुक्त कर दिया है। जबकि अधिवक्ता की पत्नी को विवि में लेक्चरर बनाने की तैयारी चल रही है। ‘हिन्दुस्तान’ में इसका खुलासा होते ही छात्रनेताओं का पारा चढ़ गया। कैंपस में खबर की प्रतियां चस्पा की गईं। अधिकारियों के चैंबर में भी फोटोकॉपी लगा दी गईं। अधिकारी आए तो उन्हें घेर लिया। वित्ताधिकारी राम सागर को खूब खरी-खोटी सुनाईं। उनसे कहा कि दागी अधिवक्ता की तनख्वाह तो वही बनाते हैं। उसके वेतन पर रोक लगाई जाए। इसके बाद बारी रजिस्ट्रार प्रभात रंजन की आई। छात्रों के सवालों पर वे निरुत्तर हो गए। युवा कांग्रेस के ब्रजेश शर्मा, छात्र लोकदल के शहर अध्यक्ष देवेन्द्र परमार, शफीक अहमद, सपा छात्रसभा के जिलाध्यक्ष मदनमोहन शर्मा, एनएसयूआई के नेशनल डेलीगेट अमित सिंह ने उन्हें आड़े हाथों लिया। आखिर में रजिस्ट्रार ने छात्रों से कहा कि वे वकील के खिलाफ सबूत उन्हें मुहैया करा दें। इस मामले की जांच कराई जाएगी।

राजभवन, मुख्यमंत्री को भेजा फैक्स
छात्रनेताओं ने अधिवक्ता अरुण दीक्षित की शिकायत का पुलिंदा राजभवन फैक्स कर दिया है। सपा छात्रसभा के नेताओं ने इस संबंध में राजभवन के एक वरिष्ठ अधिकारी से भी संपर्क किया है। इसके अलावा शिकायत की प्रति मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को भी फैक्स की गई है।

प्रो. आनंद ने फाड़ दिए सर्टीफिकेट
छात्र नेताओं ने पूर्व कुलपति प्रो. सुगम आनंद को जा घेरा। उनसे कहा कि वकील की पत्नी डा. सोना दीक्षित को सेमिनार का संयोजक क्यों बनाया गया। विवि या किसी कॉलेज में कोई टीचर नहीं थी। इन सवालों से तमतमाए प्रो. आनंद ने वकील की पत्नी के हस्ताक्षर वाले सर्टीफिकेट फाड़ दिए।

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