DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

कल का हेल्थ चार्ट बनाएं आज

अच्छी स्वास्थ्य सुविधाओं और तकनीक के कारण औसत उम्र बढ़ रही है। यह अच्छी बात है, पर इसकी चुनौतियों को समझना भी जरूरी है। बिगड़ती जीवनशैली ने युवाओं में कई ऐसे रोग पैदा कर दिए हैं, जो पहले बुढ़ापे में ही देखने को मिलते थे। ऐसे में प्रश्न है कि क्या आज के युवा का बुढ़ापा सेहतमंद होगा? यदि चाहते हैं कि ऐसा ही हो तो आज से ही तैयार हो जाएं। विशेषज्ञ क्या कहते हैं, बता रही हैं पूनम जैन

55 की उम्र में भी दिल कैसे रहेगा दुरुस्त
गैर संक्रमित बीमारियों में हृदय रोगों से होने वाली मृत्यु सबसे अधिक (19%) है। इसमें भी दुख की बात यह है कि हृदय रोगों के मामले युवा और मध्यम आयु वाले लोगों में तेजी से बढ़ रहे हैं। हार्ट अटैक से जुड़े एक नए अध्ययन के अनुसार दाखिल कराए जाने वाले 30.7 प्रतिशत पुरुषों में हार्ट अटैक से पहले छाती में दर्द के लक्षण भी देखने को नहीं मिले। हृदय रोगों से मरने वालों में अब युवा महिलाओं की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। आमतौर पर युवा प्रोफेशनल्स लगातार नींद की गड़बड़ियों, थकावट, ठंडा पसीना आना और कमजोरी के लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं।

वर्तमान जीवनशैली में कम उम्र से ही अपने खान-पान और जीवनशैली पर ध्यान रखना जरूरी है। धमनियों में संकुचन न हो और कोलेस्ट्रॉल लेवल को नियंत्रित रखने के लिए वजन कम करना जरूरी है। कम वसायुक्त भोजन करें। टोंड दूध से बने डेयरी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें। प्रोसेस्ड फूड की जगह फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ जैसे बींस, जई, दालें कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखते हैं। धमनियों में रक्त संचार नियमित रहना हार्ट अटैक के कारण होने वाली आकस्मिक मृत्यु को कम कर देता है। धूम्रपान छोड़ कर हृदय रोगों में तेजी से सुधार किया जा सकता है।  युवाओं को पर्सनल और प्रोफेशनल दोनों तरह के तनाव का सामना करना आना जरूरी है। 35 के बाद वर्ष में एक बार कोलेस्ट्रॉल लेवल व ब्लड प्रेशर की जांच कराएं। 
एन एन खन्ना, सी. कंसल्टेंट, कार्डियोलॉजी, अपोलो हॉस्पिटल

कम उम्र में खाया कैल्शियम ही आता है काम
हड्डियों को मजबूत बनाने में कैल्शियम की भूमिका सबसे बड़ी होती है। हमारी हड्डियों में से कुछ कैल्शियम निरंतर कम होता है और कुछ वापस बनता रहता है। यदि कैल्शियम बनने की तुलना में कम अधिक हो रहा होता है तो हड्डियां भुरभुरा जाती हैं। यदि 20 वर्ष की उम्र तक हम पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम लेते हैं तो शरीर में आगे भी कैल्शियम का संतुलन अच्छा बना रहेगा। खासतौर पर लड़कियों में हड्डियों का 40 प्रतिशत द्रव्यमान किशोरावस्था में विकसित होता है। हड्डियों का उच्च द्रव्यमान मीनोपॉज के बाद महिलाओं में होने वाली ओस्टियोपोरोसिस की समस्या को कम करता है।  

हड्डियों का कमजोर होना कूल्हे, रीढ़ और कलाई की हड्डियों में फ्रेक्चर की आशंका बढ़ा देता है। कैल्शियम हड्डियों, दांत, दिल की गतिविधियों और तंत्रिका तंत्र की अच्छी सेहत के लिए एक मिनरल का काम करता है। चूंकि कैल्शियम शरीर में नहीं बनता, इसलिए इसकी प्राप्ति हमें भोजन से होती है।

दूध, पनीर और दही जैसे डेयरी प्रोडक्ट खाएं। टोंड मिल्क भी कैल्शियम का अच्छा स्नोत है। बच्चों के लिए सूरज की रोशनी भी जरूरी है। धूम्रपान, अल्कोहल, काबरेनेटेड ड्रिंक, चाय व कॉफी हमारे शरीर की कैल्शियम ग्रहण करने की क्षमता को कम करते हैं। जहां तक संभव हो, इनका सेवन कम करें।
विशाखा शिवदासानी, न्यूट्रिशन एक्सपर्ट, मुंबई

आपकी उम्र से बूढ़ी लगती है आपकी त्वचा   
महिला हो या पुरुष, हर कोई चाहता है कि वह अपनी उम्र से दस साल छोटा लगे, पर अनियमित लाइफ स्टाइल, खान-पान में पोषक तत्वों की कमी, भरपूर पानी न पीना और अपनी त्वचा का ख्याल न रखना त्वचा को उम्र से पहले बूढ़ा बना देता है। उम्र बढ़ने के साथ त्वचा में पाए जाने वाले कोलेजन का प्रोडक्शन धीमा हो जाता है, जो त्वचा में कसाव और आकर्षण को बनाए रखने में उपयोगी होता है। पोषक तत्वों के अभाव और नियमित व्यायाम की कमी के कारण कोलेजन के प्रोडक्शन में तेजी से कमी होनी शुरू हो जाती है। आमतौर पर त्वचा उम्र से चार साल बड़ी लगती है। ध्रूमपान और एल्कोहल का अधिक सेवन और धूप में निकलने से पहले त्वचा पर मॉइस्चराइजर और सनस्क्रीन न लगाना और सप्ताह में तीन बार से अधिक जंक फूड खाना इस अंतर को छह साल तक बड़ा कर देता है।

उम्र से पहले त्वचा का बूढ़ा होना 90 प्रतिशत सूर्य की अल्ट्रावॉयलेट किरणों के कारण होता है। 30 साल की उम्र के बाद समय-समय पर स्क्रबिंग और फेशियल कराना भी फायदेमंद रहता है, जिससे त्वचा छिद्रों की सफाई हो जाती है। त्वचा में रक्त का संचार सही रहता है, चेहरे की मांसपेशियों में कसाव आता है। गाजर, टमाटर, पालक, गोभी और पालक जैसे विटामिन ए के स्रोत त्वचा को ब्लैकहेड्स और व्हाइटहेड्स को दूर रखते हैं। बालों को पतला होने से भी रोकते हैं। बी-कॉम्लेक्स विटामिन त्वचा पर से तनाव रेखाओं और झुरियों को दूर रखने में मदद करता है। विटामिन सी वाली चीजें जैसे आंवला, संतरा, मौसमी व अमरूद का सेवन त्वचा में कोलेजन की प्रक्रिया को नियमित रखता है। विटामिन ई त्वचा के लिए एंटी एजिंग का काम करता है, जिसके लिए बादाम खाना अच्छा रहेगा।
इंदू तोलानी, डर्मेटोलॉजिस्ट, नई दिल्ली

तंबाकू सेवन से आंखें होती है जल्दी बूढ़ी
तंबाकू और शराब का लगातार सेवन आपकी आंखों को भी नुकसान पहुंचाता है।  ऐसे में यदि व्यक्ति के भोजन में प्रोटीन एवं विटामिन- बी की कमी है तो उन्हें टॉक्सिक एम्बलायोपिया हो जाता है, जिससे सेन्ट्रल विजन में कमी आ जाती है, मरीज की पास की नजर कमजोर हो जाती है। तंबाकू सेवन करने वालों में  मोतियाबिंद भी समय से पहले बनने व पकने लगता है। काला मोतिया आमतौर पर चालीस की उम्र एवं उसके बाद देखने को मिलता है, जिसमें यदि एक बार नेत्र ज्योति जितनी चली जाती है, उसे वापस लाना सम्भव नहीं होता। तंबाकू सेवन करने वालों में तंबाकू सेवन न करने वालों की तुलना में दो से तीन गुणा अधिक मेक्युला ह्रास होता है, जिसे एज रिलेटेड मेक्यूलर डिजनरेशन कहते हैं। आयु सम्बन्धी मेक्यूला ह्रास पचास वर्ष से अधिक उम्र वाले व्यक्ति में दोनों आंखों में होने वाली अंधता का प्रमुख कारण है। चालीस की उम्र पार करने पर अपनी नेत्र ज्योति एवं आंख के प्रेशर की जांच अवश्य करानी चाहिए। अगर आंख का प्रेशर बढ़ा हुआ है तो ऐसी स्थिति में समय रहते उपचार कराना आवश्यक होता है। कंप्यूटर पर काम करते समय पलकों को जल्दी-2 झपकाते रहें। उचित रोशनी में काम करें और विटामिन-ए युक्त भोजन एवं पेय पदार्थ ज्यादा लें।
डा़ संजय तेवतिया, संयुक्त जिला चिकित्सालय, संजय नगर, गाजियाबाद

कमर का बढ़ता घेरा, बीमारियों का घर

मेटाबॉलिक सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति है, जिसमें कई अनियमितताएं एक साथ देखने को मिल सकती हैं। एक ऐसी स्थिति, जिसमें रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर की अधिकता के साथ कमर में वसा का जमाव अधिक होता है। जिन पुरुषों की कमर 35 इंच और महिलाओं में 31 इंच से अधिक है, उन्हें तुरंत अपना वजन कम करने की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। इस सिंड्रोम का सबसे बड़ा कारण मोटापा है। आमतौर पर टाइप टू डायबिटीज की शुरुआत 30 की उम्र में और हृदय रोगों की शुरुआत 40 से देखने को मिलती है, पर मेटाबॉलिक सिंड्रोम से पीड़ित लोगों में सामान्य की तुलना में 9 से 30 गुणा डायबिटीज और चार गुणा अधिक हृदय रोगों की चपेट में आने की आशंका होती है।

युवावस्था में यदि ब्लडशुगर अधिक है तो आपमें अच्छा कोलेस्ट्रॉल यानी एचडीएल कम होगा और ट्राइग्लिसिराइड का स्तर अधिक। कमर के चारों और बढ़ता घेरा इस सिंड्रोम को विकसित करने में बड़ी भूमिका निभाता है। भारतीयों में वजन की तुलना में शरीर में वसा की मौजूदगी अधिक देखने को मिलती है। माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को अच्छे खाने का चयन करना सिखाएं। सॉफ्ट ड्रिंक्स और तले-भुने स्नैक्स कम खाने को दें।
डॉ. सुमन भंडारी, फोर्टिस एस्कॉर्ट हॉस्पिटल

एक घंटा व्यायाम, बीमारियों पर लगाम

हर रोज 45 से 60 मिनट का व्यायाम बुढ़ापे के लक्षणों और उससे जुड़ी कई बीमारियों को 30 से 40 प्रतिशत तक कम कर सकता है। वजन के साथ-साथ तनाव को कम करने की अद्भुत शक्ति व्यायाम में है। फिटनेस के लिए जरूरी नहीं कि जिम ही जाएं। खासतौर पर सुबह और शाम के समय पैदल चलना बेहतरीन व्यायाम है। तेज गति से टहलने से हृदय की धड़कनें तेज होती हैं, रक्त संचार नियमित होता है और शरीर में गर्मी पैदा होती है। आधे घंटे में तय की गई दूरी में 150 कैलोरी ऊर्जा खर्च होती है, जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है। व्यायाम करने से ऑर्थराइटिस और हड्डियों के फ्रैक्चर की आशंका कम हो जाती है। प्रतिदिन 2.5 किलोमीटर टहलने का प्रयास करें।

स्वीमिंग और साइक्लिंग भी अच्छा विकल्प है। घर के काम करना, बागवानी, सीढ़ियां चढ़ने के लाभ भी कम नहीं हैं। जिम जाते हैं तो थोड़ी देर कार्डियो एक्सरसाइज भी करें। नियमित रूप से योगा और ध्यान करना भी तन और मन के लिए अच्छा रहता है। अधिक नहीं कर सकते तो कम से कम योगा में सूर्य नमस्कार करें। यह एक कंप्लीट व्यायाम है, जिससे संभी अंगों का वर्कआउट हो जाता है।
निशा वर्मा, रीबॉक फिटनेस ट्रेनर

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:कल का हेल्थ चार्ट बनाएं आज