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काउंसलिंग तरक्की के लिए सुझाए सही करियर

काउंसलिंग तरक्की के लिए सुझाए सही करियर

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले का रहने वाला नरेंद्र सिंह 12वीं की परीक्षा दे रहा है, पर अभी से उसे यह बेचैनी सता रही है कि कला विषयों से 12वीं करने के बाद उसका भविष्य क्या होगा। यों वह आईएएस अधिकारी बनना चाहता है, पर यह नहीं जानता कि क्या कला विषयों से पढ़ाई करके वह आईएएस बन सकता है, यदि बन सकता है तो उसे ग्रेजुएशन में कौन से विषय लेने चाहिए। क्या उसे आगे की पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम से करनी होगी। अभी तक वह हिन्दी माध्यम से ही पढ़ाई करता आया है। नाटे कद का होने के कारण वह अपनी पर्सनेलिटी को लेकर भी काफी परेशान है। अपनी इन्हीं सब परेशानियों के समाधान के लिए उसने एक दिन हिन्दुस्तान अखबार में फोन किया। उसके इतने सवालों के बारे में उसे संतुष्ट करना आसान नहीं था, सो उसे राय दी गई कि वह अपनी काउंसलिंग करवा ले तो सब स्पष्ट हो जाएगा। नरेंद्र काउंसलिंग के नाम से हड़बड़ा गया। दरअसल काउंसलिंग के बारे में उसने पहली बार सुना था। काउंसलिंग क्या है, कैसे होती है और उसके क्या लाभ हो सकते हैं, इसकी उसे जानकारी नहीं थी। नरेंद्र की तरह ऐसे अनेक छात्र हैं, जो काउंसलिंग के बारे में बहुत स्पष्ट जानकारी नहीं रखते और इसका फायदा नहीं उठा पाते। काउंसलिंग क्या है और उसका एक छात्र या करियर बनाने वाले के जीवन में क्या महत्व है, इसके बारे में विशेषज्ञों की राय के साथ विस्तार से बता रहे हैं अनुराग मिश्र।

हर व्यक्ति की अपनी एक अलग पहचान होती है। लोग समाज में उसे उसकी पहचान, काबिलियत और उसके हुनर की बदौलत जानते हैं। जिंदगी को मुकाम देने के लिए अक्‍सर देखने में आता है कि युवा सही करियर या पढ़ाई के लिए सही क्षेत्र का चुनाव नहीं कर पाते। इससे उनके अंदर का व्यक्तित्व बाहर नहीं आ पाता। ऐसे में न तो वे अपने करियर और पढ़ाई में सफलता हासिल कर पाते हैं और न ही जिंदगी में संतुष्ट हो पाते हैं।
मोनालिसा जैसी पेंटिंग बनाने वाले पाबलो पिकासो से किसी ने एक बार पूछ लिया कि आप पेंटर क्यों बने तो पिकासो ने कहा कि मेरी मां ने मुझे कहा था कि अगर तुम सैनिक बनते हो तो तुम जनरल जरूर बनोगे, अगर तुम साधु बनते हो तो तुम पोप जरूर बनोगे, बजाए इसके मैं एक पेंटर बना। पिकासो की ये पक्तियां हमें ये सीख देती हैं कि हमें खुद के अंदर छिपी प्रतिभा को पहचानना चाहिए, क्योंकि करियर के नाम पर सिर्फ नौकरी करना और रोजी-रोटी कमाना ही जिंदगी नहीं है। करियर के नाम पर आपका खुद का विकास बहुत जरूरी है, क्योंकि अगर आपका विकास नहीं होगा तो जिस क्षेत्र में आप काम कर रहे हैं, वहां आप एक रुटीन काम ही करते रहेंगे, सफलता कभी आपके कदम नहीं चूमेगी। ऐसे में जिस पेशे में भी आप अपना करियर बनाएं, उसमें जी-तोड़ मेहनत करें। किसी की देखा-देखी या बाजार में प्रचलित करियर के अनुरूप करियर न बनाएं। अगर ऐसा होता तो न तो सचिन तेंदुलकर होते, न एआर रहमान, न आमिर खान और न ही चेतन भगत।

काउंसलिंग
काउंसलिंग के माध्यम से किसी भी छात्र के उसके डोमेन में उसके अनुरूप बेहतर विकल्पों को तलाशा जाता है। काउंसलिंग द्वारा छात्रों की क्षमताओं का आकलन, संबंधित क्षेत्र में करियर के विकल्प तलाशना, लॉन्ग टर्म लक्ष्यों और भविष्य का रोडमैप तैयार किया जाता है। करियर काउंसलर परवीन मल्होत्रा कहती हैं कि अगर गलती से भी आपने गलत करियर या विषय चुन लिया तो आपकी जिंदगी की गाड़ी पटरी पर न तो सरपट दौड़ पाएगी और न ही सफलता आपके हिस्से में आएगी। अगर आपने ऐसा करियर या विषय चुना, जो आपकी पर्सनेलिटी, आपकी रुचि पर फिट बैठता है तो आप उसमें बेहतर करने का हरसंभव प्रयास करेंगे और अगर आपने ऐसा करियर चुन लिया, जो आपने सिर्फ दोस्तों के कहने पर चुना है तो आपकी आधी कामयाबी वहीं से कम हो जाएगी। डीयू के डिप्टी डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर डॉ. गुरप्रीत सिंह टुटेजा कहते हैं कि करियर काउंसलिंग आवश्यक है। यह आपके दिमाग को फिल्टर करने का काम करती है। प्रमुख बात यह है कि एक बार आप करियर चुनने में भटक गए तो ताउम्र तनाव आप पर हावी रहेगा। करियर में भटकने पर किसी भी छात्र की स्थिति रेगिस्तान में रास्ता भूले मुसाफिर की तरह होती है, जहां उसके सामने दो चुनौतियां होती है-पहली यह कि वह अपना रास्ता तलाशे और दूसरी, तपती धूप में खुद को शिद्दत से जमाए रखे।

कैसे करते हैं काउंसलिंग
काउंसलिंग के लिए छात्र का एप्टीटय़ूड टेस्ट लिया जाता है। इसके द्वारा छात्र की विश्लेषणात्मक क्षमता, उसकी सोच, विषय पर पकड़ आदि का पता लगाया जाता है। इसके अलावा उसका मनोवैज्ञानिक टेस्ट भी किया जाता है। करियर काउंसलर रहमान बताते हैं कि एप्टीटय़ूड टेस्ट में यह जांचा जाता है कि  छात्र ने किस विषय के कितने प्रश्नों का उत्तर दिया, उन्हें कैसे हल किया। साथ ही उसनेप्रश्नों को किस आधार पर हल किया है। करियर काउंसलर हनुमंत सब्बरवाल कहते हैं कि काउंसलिंग के दौरान छात्र-छात्र के रुझान और रुचि को देखा जाता है। उदाहरण के तौर पर यदि कोई छात्र कहता है कि उसकी एयरोनॉटिकल में रुचि है, लेकिन वह मैथ्स की पढ़ाई नहीं करना चाहता तो ऐसे में सबसे पहले उस क्षेत्र के रुझान के मुताबिक करियर के विकल्प तलाशे जाते हैं। विकल्प देते समय इस बात का भी ध्यान रखा जाता है कि लॉन्ग टर्म में वह छात्र के लिए कैसा है। स्मार्ट प्रेप के सीईओ नीतेश गुप्ता कहते हैं कि करियर काउंसलिंग के माध्यम से मुख्यत: किसी अभ्यर्थी की रियल लाइफ में काम करने की क्षमता को जांचा जाता है।

ऐसा क्षेत्र जो शोहरत और पैसा दिलाए
करियर या पढ़ाई के लिए विषय चुनना सिर्फ जीविकोपाजर्न का मसला नहीं है, क्योंकि रोजी-रोटी तो इंसान किसी तरह कमा ही लेगा। पर अगर आप ऐसे काम को अपनाएं, जो आपकी जीविका का स्त्रोत तो बनें ही, साथ ही आपको तरक्की और संतुष्टि भी दे तो ज्यादा बेहतर होगा। हो सकता है कि आप किन्हीं तीन-चार के अनुरूप फिट बैठते हों, पर यह आपकी काबिलियत है कि आप उनमें से अपने लायक सबसे बेहतर करियर का चुनाव कर सकें और इसमें अगर आप सफल हो गए तो सफलता आपकी रहगुजर होगी। करियर काउंसलर परवीन मल्होत्र कहती है कि काउंसलिंग के लिए आने वाले छात्र का कॉमन सवाल यही होता है कि कौन-सा करियर या विषय लेने पर उन्हें तरक्की और शोहरत जल्दी मिलेगी।       

सिर्फ एक ही करियर है, जो कि मेरे लिए पूरे तौर पर सही है
प्रत्येक व्यक्ति की रुचियां अलग-अलग होती हैं। सभी के काम करने का तरीका अलग होता है। ऐसे में हरेक व्यक्ति अपनी रुचि, स्किल के मुताबिक करियर का चयन करने की कोशिश करता है, जो उसे संतुष्टि प्रदान करता हो। जैसे-जैसे आप बड़े होंगे, आप महसूस करेंगे कि एक से ज्यादा करियर हैं, जो आपके लिए जिंदगी की किसी स्टेज और स्थिति के अनुरूप आपके लिए सही होते हैं।

उस क्षेत्र में सफलता तय है, जिसका क्रेज ज्यादा है या ज्यादातर लोग उसे ही अपना रहे हैं
अक्‍सर आपके बड़े या परिचित आपको प्रचलित करियर के बारे में सलाह देते रहते हैं, चूंकि उनका उस क्षेत्र से ज्यादा वास्ता नहीं होता, ऐसे में वह आपको ऐसे करियर के बारे में ही बताते हैं, जिसके बारे में उन्होंने काफी सुन रखा है या सुन रहे होते हैं। वहीं अकसर यह भी देखने में आता है कि मेरा दोस्त उस क्षेत्र में जा रहा है तो मैं भी उस क्षेत्र में जाऊं। यह सही नहीं है।    

अगर मैंने अपना करियर या विषय बदला तो मैं असफल हो जाऊंगा
बदलाव जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसा सोचना कि किसी कंपनी में बस मुझे एक नौकरी मिल जाए और उसमें मैं अपनी पूरी उम्र काट दूंगा या फिर मैं साइंस क्षेत्र का हूं, मेरी लॉ में रुचि है, पर लोग  कहते हैं कि साइंस छोड़ी तो फेल हो जाओगे, सही नहीं है। करियर काउंसलर हनुमंत कहते हैं कि कई बार देखने में आता है कि बारहवीं के बाद एक विषय से दूसरे विषय में जाने पर सफलता बेहतर मिलती है, पर छात्रों के मन में इसे लेकर संशय होता है। वह कहते हैं कि तकनीकी परिदृश्य में आए बदलाव की वजह से पूरे जीवन में प्रत्येक के लिए परिस्थितियों के मुताबिक अलग-अलग करियर होते हैं और इनकी संख्या तीन से चार तक हो सकती है।

मैं मेहनती हूं तो मैं कुछ भी कर सकता हूं
आप वास्तविकता में जिएं। अपनी सीमाओं को समझों। करियर या विषय का फैसला लेते समय इस बात को जेहन में रखें। उदाहरण के तौर पर आपकी नजर कमजोर है, पर आप पायलट या पुलिस ऑफिसर बनना चाहते हैं। ऐसे में आपकी कड़ी मेहनत का गुण ज्यादा फायदेमंद साबित नहीं होता। और हां, जिंदगी में कुछ सीमाएं होने में बुराई भी नहीं है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के अध्यापक गंगा सहाय मीणा कहते हैं कि मेहनत हर समस्या का हल होती है, पर करियर या विषय के चुनाव में इस बात को आधार बनाना आपकी तरक्की के प्रतिशत को कम कर देता है।

मैं किसी क्षेत्र या विषय के लिए उपयुक्त हूं, इसका मतलब यह है कि मैं इस क्षेत्र के लिए सबसे बेहतर हूं।
कुछ लोग यह सोचते हैं कि कुछ क्षेत्र उनकी पर्सनेलिटी और स्किल के अनुरूप होते हैं और उसमें वह पूरी तरह से फिट बैठते हैं। सफलता को स्वयं के अनुरूप मापदंड बना कर मापना चाहिए, न कि किसी की सलाह या फिर देखा-देखी। आपके मुताबिक यह करियर फिट है, इसका पता आप खुद की स्किल और क्षमताओं के आधार पर लगा सकते हैं।

प्राइवेट या सरकारी नौकरी
करियर काउंसलर एमएच रहमान कहते हैं कि छात्रों का सबसे बड़ा मिथक होता है सरकारी और प्राइवेट जॉब को लेकर। करियर को लेकर कई छात्र पूरी तरह इस बात के प्रति पक्के होते हैं कि उन्हें सरकारी जॉब नहीं करनी, जबकि कुछ का मानना होता है कि उन्हें प्राइवेट नौकरी नहीं करनी है।

एंट्रेंस है तो मुश्किल ही होगा
करियर काउंसलर हनुमंत सब्बरवाल कहते हैं कि अमूमन छात्रों में यह धारणा रहती है कि अगर किसी कोर्स में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा ली जा रही है तो वह मुश्किल ही होगी। ऐसे में उनकी नजर में इस तरह की परीक्षा की अहमियत काफी बढ़ी हुई होती है।

कुछ अलग करना है
स्मॉर्ट प्रेप के सीईओ और करियर काउंसलर नीतेश गुप्ता कहते हैं कि मौजूदा समय में छात्रों के अंदर कुछ अलग करने की बात होती है। पर देखने में आता है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं होती कि उन्हें अलग करना क्या है। ट्रेंड से हट कर करने की ख्वाहिश उनके मन में होती है, ऐसे में उन पर अपने मजबूत पक्षों को दरकिनार कर कुछ नया करने की धुन सवार रहती है।

नंबर जिसमें अच्छे, उसमें करियर बेहतर
करियर चुनते समय सबसे आम धारणा यही होती है कि मेरे इस विषय में अंक अच्छे हैं तो इसमें करियर अपनाऊंगा। नीतेश कहते हैं कि इस आधार पर करियर का चुनाव करना और उसमें सफलता हासिल करने का प्रतिशत 50-50 होता है।

दोस्त चुन रहे हैं अमुक करियर
हनुमंत सब्बरवाल कहते हैं कि काउंसलिंग में आने वाले छात्र उस करियर को ही अपनाने पर अधिक जोर देते हैं, जिसे उनके दोस्त अपना रहे होते हैं। उस दौरान छात्र अपने मजबूत और कमजोर पक्ष को नहीं देखते, बल्कि वह भावनात्मक रूप से फैसला करते हैं। रहमान कहते हैं कि प्रमुख बात यह है कि पारिवारिक पेशे को अपनाने में छात्रों का कांसेप्ट पूरी तरह स्पष्ट होता है। वे पारिवारिक करियर को अपनाने या नहीं अपनाने के लिए सटीक सोच रखते हैं।

काउंसलिंग के फायदे
विकल्पों के बारे में जानकारी: मौजूदा समय में करियर के ढेरों विकल्प हैं। विभिन्न क्षेत्रों में स्पेशलाइजेशन की भरमार है। ऐसे में छात्रों को उनके क्षेत्र से जुड़े स्पेशलाइजेशन, विकल्पों के बारे में जानकारी देने में काउंसलिंग काफी अहम साबित होती है। 

दीर्घकालिक लक्ष्य: काउंसलिंग छात्रों के लक्ष्य को दीर्घकालिक बनाने में मददगार साबित होती है। स्मार्ट प्रेप के सीईओ नीतेश गुप्ता कहते हैं कि अमूमन छात्र करियर या कोर्स के बारे में तय करते समय दीर्घकालिक लक्ष्यों के बारे में गौर नहीं करते, वे करियर के बारे में शॉर्ट टर्म एप्रोच रखते हैं। ऐसे में काउंसलिंग की मदद से उनके भविष्य का रोडमैप तैयार किया जाता है।

सोच में स्पष्टता: दिल्ली विश्वविद्यालय के डिप्टी डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर डॉ. गुरप्रीत सिंह टुटेजा कहते हैं कि कुछ छात्रों के मन में इस बात को लेकर तो स्पष्टता होती है कि उन्हें अमुक क्षेत्र या कोर्स लेना है, पर उनके एक या दो संदेह उनका करियर खराब कर देते हैं। उदाहरण के तौर पर यदि कॉमर्स में पढ़ाई करने वाला छात्र एमबीए या सीए में से एक करियर चुनने की बात करे, उस दौरान काउंसलिंग उसकी सोच से उसके असमंजस को दूर करने में मददगार होती है।

काउंसलिंग के बारे में काउंसलरों की राय
प्रत्येक व्यक्ति की अपनी खासियत और स्वभाव होता है। यहां तक कि जुड़वां बच्चों के भी स्वभाव अलग-अलग होते हैं। ऐसे में करियर और विषय चुनते समय अपनी रुचि, पर्सनेलिटी और टेंपरामेंट का खासतौर पर ध्यान रखें, क्योंकि ये कोई अल्पकालिक प्रक्रिया नहीं है।
परवीन मल्होत्रा, करियर काउंसलर

सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, खासकर करियर और विषय के चुनाव में। ऐसे में काउंसलिंग किसी भी छात्र के भविष्य का रोडमैप तैयार करने में सबसे ज्यादा असरदार होती है। वह छात्र को उधेड़बुन से बाहर निकालती है और सोच को सटीक बनाती है।
हनुमंत सब्बरवाल, करियर काउंसलर

मौजूदा समय में करियर के हजारों विकल्प हैं। इनमें से कुछ करियर ऐसे हैं, जो आने वाले समय में बड़े करियर के तौर पर स्थापित होने जा रहे हैं तो कुछ ऐसे होते हैं, जिनकी समयावधि छोटी होती है। ऐसे में काउंसलर से सलाह लेकर करियर की गुत्थी सुलझाई जा सकती है।
नीतेश गुप्ता, करियर काउंसलर और सीईओ स्मार्ट प्रेप

करियर काउंसलिंग दिमाग की उलझन कम कर देती है। यह आपको आपके लक्ष्य को हासिल करने में मदद करती है। गलत करियर का चुनाव ताउम्र आपके लिए तनाव का कारण बन जाता है। उस दौरान किसी की स्थिति रेगिस्तान में फंसे हुए मुसाफिर की तरह हो जाती है।
डॉ. गुरप्रीत सिंह टुटेजा, डिप्टी डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर, दिल्ली विश्वविद्यालय

करियर जिंदगी का सबसे अहम फैसला होता है। ऐसे में इसका चुनाव करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। प्रमुख बात यह भी है कि करियर काउंसलर आपके सामने करियर के विकल्प रखता है। अंतिम फैसला छात्र का ही होता है कि उसे कौन सा करियर चुनना है।
एमएच रहमान, करियर काउंसलर

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