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हॉकी की राष्ट्रीय खिलाड़ी गुमनामी और बदहाली में

खूंटी संवाददाता। सालों बाद राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी नौरी मुंडू सोमवार को खिलखिलाईं। दरअसल, कांके स्थित इंडियन इंडस्ट्रीज ऑफ कोल मैनेजमेंट ने उन्हें नौकरी का प्रस्ताव भेजा है जिसकी खुशी वह छिपा न सकीं। खास बात यह है कि संस्थान के चीफ इंजीनियर एक हफ्ते में माहिल गांव आकर खुद नौरी को ले जाएंगे।

माहिल के स्कूल में डेढ़ हजार रुपए मानदेय पर बच्चों को पढ़ाने वाली नौरी अब खेल के मैदान में बतौर कोच खिलाडिम्यों को हॉकी सिखाएंगी। इंस्टीट्यूट के डीवाई (सिविल) चीफ इंजीनियर एसएन सिंह ने बताया कि ‘हिन्दुस्तान’ में नौरी की बदहाली की खबर छपी थी।

इसके बाद सामाजिक जिम्मेवारी के तहत नौरी को नौकरी देने का निर्णय किया गया। 19 राष्ट्रीय खेलों में प्रतिनिधित्व करने वाली नौरी गुमनामी में जिंदगी बिता रही थी। अब उसके दिन फिरने वाले हैं।

शिक्षकों और गांववालों में खुशी की लहर : जैसी ही नौरी को हिंदुस्तान से यह जानकारी मिली कि उसे आइआइसीएम ने नौकरी का प्रस्ताव भेजा है, वह खुशी से झूम उठी।

उसने उसी वक्त फोन पर बात कर नौकरी करने के लिए सहमति जता दी। नौरी के कोच दशरथ महतो ने कहा कि आइआइसीएम ने अच्छा कदम उठाया है। नौरी ने बहुत दु:ख ङोले। गांव के उमेश्वर मांझी, रामधारी राम, उपमुखिया जगन्नाथ मुंडा सहित अन्य लोगों ने भी खुशी का इजहार किया।

फिर निशाना साधेगी धनुर्धर निशा पैसे की तंगी से निपटने के लिए चार लाख का धनुष बेचने को मजबूर होने वाली अंतरराष्ट्रीय तीरंदाज निशा रानी दत्ता का रिश्ता एक बार फिर धनुष-बाण से जुड़ जाएगा।

उपमुख्यमंत्री सह खेलमंत्री सुदेश महतो ने निशा से सोमवार को उसके घर पर मुलाकात की। उन्होंने निशा को 25000 रुपए का चेक और सोने का धनुष प्रतीक के रूप में भेंट किया। उन्होंने निशा से कहा कि वह खेल पर ध्यान लगाएं।

सरकार उन्हें पूरा सहयोग करेगी। सिल्ली स्थित तीरंदाजी अकादमी में निशा को अभ्यास करने के लिए आमंत्रित भी किया। निशा ने कहा कि वह अभ्यास शुरू कर आने वाले दिनों में टूर्नामेंटों में पदक जीतना चाहेंगी।

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