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बीड़ी पत्ता चुनने वालों को सालभर की मजदूरी

रांची ’ रवि। राज्यभर में बीड़ी पत्ता (केंदू पत्ता) चुनने वाले लगभग 75 हजार परिवारों को सालभर न्यूनतम मजदूरी दी जाएगी। झारखंड राज्य वन विकास निगम इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर रहा है। इस संदर्भ में बीड़ी पत्ता चुनने वाले परिवारों को चिह्न्ति करने का भी काम पूरा कर लिया है। मजदूरों का 35 हजार रुपए का इंश्योरेंस भी कराया जाएगा।

मजदूरों के लिए अलग से फंड की भी व्यवस्था होगी। इस प्रस्ताव को कैबिनेट की अगली बैठक में रखा जाएगा। पड़ोसी राज्यों से आगे निकला झारखंड केंदू पत्ती के कारोबार में झारखंड अपने पड़ोसी राज्यों छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश से आगे निकल गया है।

मध्यप्रदेश को 15 और छत्तीसगढ़ को 13 करोड़ का राजस्व केंदू पत्ती से मिला है। झारखंड के चाईबासा, लातेहार, पलामू और लोहरदगा में बेस्ट क्वालिटी के केंदू पत्तियों का संग्रहण किया गया। इससे 21 करोड़ राजस्व की प्राप्ति हुई है। यह स्थिति तब है कि केंदू पत्ती संग्रहण से जुड़े ज्यादातर जिले नक्सल प्रभावित हैं।

राजस्व की रिकॉर्ड वसूली झारखंड राज्य वन विकास निगम ने वित्तीय वर्ष 11-12 में रिकार्ड राजस्व की वसूली की है। निगम को सबसे अधिक कमाई केंदू पत्ती से ही हुई है। निगम के अध्यक्ष उमाकांत रजक ने बताया कि केंदू पत्ती से 21 करोड़ का राजस्व मिला है, जबकि स्टेट ट्रेडिंग (लकड़ी) से दो करोड़ रुपए का राजस्व मिला है।

75 हजार परिवार ’ झारखंड राज्य वन विकास निगम तैयार कर रहा है प्रस्ताव’ 35 हजार के इंश्योरेंस के अलावा अलग से होगी फंड की व्यवस्थाराजस्व को और बढ़ाया जाएगा। अलग से फंड के लिए जल्द बैठक की जाएगी।

बीड़ी पत्ता चुनने का काम दो माह ही होता है। बाकी समय मजदूर बेकार हो जाते हैं। इस कारण साल भर के लिए न्यूनतम मजदूरी तय की जाएगी। उमाकांत रजक, अध्यक्ष वन विकास निगम

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